कानपुर शहर व आसपास के कई जिलों की गर्भवती महिलाओं के लिए उपचार के प्रमुख केंद्र डफरिन अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं की कमी मरीजों का दर्द बढ़ा रही है। सप्ताह के तीन दिन ही अल्ट्रासाउंड जांच हो रही है। शेष दिनों में प्राइवेट सेंटर के भरोसे रहना पड़ता है। इसके साथ ही अन्य जांच के लिए भी उर्सला का रुख करना पड़ता है।
डफरिन अस्पताल की अव्यवस्थाएं 24 घंटे बेहतर उपचार के दावे की पोल खोल रही हैं। प्रसव पीड़ा से परेशान महिलाएं जांच और अल्ट्रासाउंड के लिए प्राइवेट सेंटरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। तीमारदार नेहा ने बताया कि रात के समय स्टाफ मरीजों की देखरेख में कोताही बरतता है। डाक्टरों की उपस्थिति में सक्रिय रहने वाली नर्स और सफाई कर्मचारी मनमानी करते हैं। इसी प्रकार चमनगंज निवासी दानिश ने बताया कि अस्पताल में स्ट्रेचर से लेकर शौचालय तक बदहाल हैं। रात में मरीज के आने पर काफी परेशानी उठानी पड़ती है तब जाकर भर्ती किया जाता है।
वहीं, डफरिन अस्पताल की प्रमुख डा. सीमा श्रीवास्तव ने बताया कि डफरिन में अल्ट्रासाउंड करने के लिए कांशीराम चिकित्सालय से टीम आती है इसलिए सिर्फ तीन दिन यह सुविधा मिल पा रही है। इसके साथ ही उर्सला में दो जांचों के लिए गर्भवती महिलाओं को जाना पड़ता है। जल्द ही अल्ट्रासाउंड और अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर लिया जाएगा। व्यवस्था सही ढंग से चलाने के लिए जल्द कमेटी का गठन भी किया जा सकता है।
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ई-श्रम पोर्टल पर सर्वाधिक पंजीयन कराकर प्रदेश पहले पायदान पर
कानपुर में भारत सरकार विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों के लिए योजनाएं लागू कर रही है। योजनाओं को जमीनीस्तर पर पहुंचाने में अहम भूमिका श्रम विभाग की होती है। केंद्र सरकार की ओर से लांच किए गए ई श्रम पोर्टल पर यूपी में सर्वाधिक पंजीयन हुए हैं। पोर्टल पर कानपुर से ही 15 लाख से ज्यादा लोगों ने पंजीयन कराया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने देश भर में ई श्रम पोर्टल पर देश भर में यूपी से सर्वाधिक श्रमिकों का पंजीयन होने पर पहले पायदान में शामिल किया है। उत्तर प्रदेश को प्रथम स्थान दिलाने में श्रमायुक्त डा. राजशेखर, अपर श्रमायुक्त एसपी शुक्ला, सहायक श्रमायुक्त डा. निकी नैनसी, बालगोविद, प्रभात मिश्रा, रजनीश उपाध्याय, विश्राम प्रसाद ने अहम भूमिका निभाई।
