सर्वप्रथम बृक्षारोपण किया गया

भारत सेवक समाज, कानपुर द्वारा संस्था के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 गुलजारी लाल नंदा की 123वीं जयन्ती पर आज रविवार 4 जुलाई, 2021 स्थान गाँधी पार्क, गांधीग्राम, कानपुर में सर्वप्रथम बृक्षारोपण किया गया। तत्पश्चात एक चिंतन गोष्ठी का आयोजन कार्यकारी अध्यक्ष अतहर नईम की अध्यक्षता में की गयी। इस अवसर पर महामंत्री शरद प्रकाश अग्रवाल ने मुख्य अथिति के रूप में पधारे प्रमुख समाजसेवी एवं देहदान प्रणेता श्री मनोज सेंगर एवं सभी उपस्थित महानुभावों का स्वागत करते हुए संस्था के बारे विस्तार से प्रकाश डालते हुये बताया कि संस्था की स्थापना 12 अगस्त 1952 को योजना आयोग की संतुति पर की गई थी। मा0 नंदाजी उस समय योजना आयोग के उपाध्यक्ष भी थे, तथा वे इस संस्था के आजीवन राष्ट्रीय चैयरमैन रहे। आज संस्था को राष्ट्रीय चैयरमैन के रूप में स्वामी केशवानंद (पटना) एवं प्रदेश अध्यक्ष के रूप में श्री सत्यजीत ठाकुर, से0 नि0 आई0ए0एस0 (लखनऊ) का कुशल मार्गदर्शन प्राप्त है। स्वागताध्यक्ष पूर्व पार्षद मदन लाल भाटिया के साथ कार्यक्रम संयोजक एवं श्रीकृष्ण को0हा0 सो0 लि0 के सचिव अरविंद कुमार दीक्षित, एडवोकेट ने दो बार रहे पूर्व कार्यवाहक प्रधानमंत्री भारतरत्न मा0 गुलजारी लाल नंदा जैसे राजनैतिक सन्त की जयंती मनाने पर भारत सेवक समाज के पदाधिकारियों की सराहना की। इस अवसर पर संस्था के गांधीग्राम वार्ड 28 की कमेटी के अध्यक्ष विजय श्रीवास्तव एवं संयोजक/सचिव मनोज सिंह का भी मनोनयन किया गया।

मुख्य अथिति ने कहा कि श्री गुलजारीलाल नंदा एक ऐसे राजनेता थे जो दो बार भारत के कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने. वे पहली बार पंडित जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद 1964 में कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाए गए और दूसरी बार श्री लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद 1966 में यह कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने. दोनो बार इनका कार्यकाल उसी समय तक सीमित रहा जब तक कि कांग्रेस पार्टी ने अपने नए नेता का चयन नहीं कर लिया.
श्री नंदा एक समर्पित गाँधीवादी, स्वाधीनता सेनानी, कुशल व सख्त प्रशासक और कांग्रेस पार्टी के प्रभावशाली नेता थे. आज उनकी जयंती है. नन्दा जी के बारे में बतलाया कि प्रधानमंत्री बनने से पूर्व एवं हटने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय को आने जाने का खर्च अपने पास से काटने हेतु पत्र लिखा था जो कि भी म्यूजियम में उपलब्ध है।
वक्ताओं ने बताया कि श्री गुलजारी लाल नंदा जी का जन्म 4 जुलाई 1898 को पंजाब के सियालकोट में हुआ था. उन्होंने लाहौर, आगरा एवं इलाहाबाद में अपनी शिक्षा प्राप्त की . उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय (1920 -1921) में श्रम संबंधी समस्याओं पर एक शोध अध्येता के रूप में कार्य किया एवं 1921 में नेशनल कॉलेज (मुंबई) में अर्थशास्त्र के प्राध्यापक बने.
1921 में वे गाँधी जी के आव्हान पर ‘असहयोग आंदोलन’ में कूद पड़े.1922 में वे ‘अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन’ के सचिव बने जिसमें उन्होंने 1946 तक काम किया. उन्हें 1932 में सत्याग्रह के कारण गिरफ्तार कर लिया गया.1942 से 1944 तक भी वे जेल में रहे।
श्री नंदा 1937 में बम्बई विधान सभा के लिए चुने गए एवं 1937 से 1939 तक वे बंबई सरकार के संसदीय सचिव (श्रम एवं उत्पाद शुल्क) रहे. बाद में, बंबई सरकार के श्रम मंत्री (1946 से 1950 तक) के रूप में उन्होंने राज्य विधानसभा में सफलतापूर्वक श्रम विवाद विधेयक पेश किया .उन्होंने ‘ कस्तूरबा मेमोरियल ट्रस्ट ‘ में न्यासी के रूप में, ‘हिंदुस्तान मजदूर सेवक संघ’ में सचिव के रूप में एवं ‘बाम्बे आवास बोर्ड ‘में अध्यक्ष के रूप में कार्य किया . वे ‘राष्ट्रीय योजना समिति ‘ के सदस्य भी रहे . ‘राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस’ के आयोजन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और बाद में इसके अध्यक्ष भी बने .
1947 में उन्होंने जेनेवा में हुए ‘ अंतरराष्ट्रीय श्रम सम्मेलन’ में एक सरकारी प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया. उन्होंने सम्मेलन द्वारा नियुक्त ‘द फ्रीडम ऑफ़ एसोसिएशन कमेटी’ पर कार्य किया एवं स्वीडन, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, बेल्जियम एवं इंग्लैंड का दौरा किया ताकि वे उन देशों में श्रम एवं आवास की स्थिति का अध्ययन कर सकें.
मार्च 1950 में वे ‘ योजना आयोग’ में इसके उपाध्यक्ष के रूप में शामिल हुए. सितंबर 1951 में वे केंद्र सरकार में योजना मंत्री बने. उन्हें सिंचाई एवं बिजली विभागों का प्रभार भी दिया गया. वे 1952 के आम चुनाव में मुंबई से लोक सभा के लिए चुने गए एवं फिर से योजना, सिंचाई एवं बिजली मंत्री के रूप में नियुक्त हुए. उन्होंने 1955 में सिंगापुर में आयोजित ‘ योजना सलाहकार समिति’ एवं 1959 में जेनेवा में आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय श्रम सम्मेलन’ में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया.
1957 के दूसरे आम चुनाव में नंदा जी लोकसभा के लिए निर्वाचित हुये नेहरू जी ने उन्हें श्रम तथा रोजगार और नियोजन के केंद्रीय मंत्री बनाया. वे योजना आयोग के उपाध्यक्ष बनाये गये. उन्होंने 1959 में जर्मन संघीय गणराज्य, यूगोस्लाविया एवं ऑस्ट्रिया का दौरा किया.
1962 के आम चुनाव में वे गुजरात के साबरकांठा निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए पुन: निर्वाचित हुए. उन्होंने 1962 में समाजवादी विचारों के प्रोत्साहन के लिए ‘कांग्रेस फोरम ‘की शुरूआत की. वे 1962 एवं 1963 में केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री एवं 1963 से 1966 तक गृह मंत्री रहे. वे पं. नेहरू एवं लाल बहादुर शास्त्री दोनो के ही विश्वासपात्र थे.
15 जनवरी 1998 को अहमदाबाद में 99 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ.
इस बृक्षारोपण एवं चिंतन गोष्ठी में अध्यक्ष अतहर नईम, महामंत्री शरद प्रकाश अग्रवाल, अरविंद कुमार दीक्षित, सीमा अग्रवाल, कृष्णा शर्मा, पूर्व पार्षद मदन लाल भाटिया, मनोज सिंह, विजय श्रीवास्तव, योगेश ठाकुर, एस0पी0 तिवारी, आर0पी0 शुक्ला, हिमांशु यादव, पूर्व पार्षद के0एल0 कुशवाहा, कमलेश मिश्र, शैलेन्द्र कपूर, पवन जैन, पंकज मिश्र, सूर्यभान सिंह, कुलदीप श्रीवास्तव आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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