जिला प्रशासन के लोगों की संलिप्तता साफ दिखाई दे रही है

कानपुर देहात। जिले की सदर तहसील अकबरपुर के गांव रहनियांपुर ने आजकल राजनीत बहुत हावी होती दिखाई देती है जिसमें जिला प्रशासन के लोगों की संलिप्तता साफ दिखाई दे रही है । बताते चलें कि रहनियांपुर गांव में कुछ लोग लगभग 100 वर्ष से पड रहे घूरों की जगहों पर कब्जा करने पर आमादा हुए हैं ऐसे में लेखपाल द्वारा उपरोक्त जमीन को घूरों की ना बता कर आबादी की जमीन बताते हुए उस में घी डालने का काम किया गया है जिसके चलते एक लंबे समय से विवादास्पद जगह को तूल देने का काम किया गया। अब हर किसी की नजर उस आबादी की जगह पर है जिस पर लेखपाल द्वारा आबादी की जगह का होना बताया गया है क्योंकि जो लोग लगभग 100 वर्षों से उपरोक्त स्थान पर अपने घूर डालने का कार्य करते हैं लेखपाल द्वारा अचानक उस जगह को आबादी कह कर बता देना गवारा नहीं हो रहा है वहीं पर गांव सभा रहनियापुर के मजरा मिलकिया में सविता परिवार की जमीन होने का भी विवाद खड़ा हो रहा है सविता परिवार की एक महिला द्वारा बने खड़े मकानों की जगह को कागजों सहित अपनी पुश्तैनी जमीन बताई जा रही है वही ठीक सामने बने प्राथमिक व जूनियर सेकंडरी विद्यालय के बगल में खलिहान में बने मकान लेखपाल को दिखाई नहीं दे रहे इसी तरह महज 100 मीटर की दूरी पर किले के रूप में तब्दील कई एकड़ भूमि जिस पर लगातार कब्जा किया जा रहा है अभी होलिका दहन के अवसर पर उपरोक्त मामला तहसील स्तर के अधिकारियों के संज्ञान में भी आया है वह भी लेखपाल को नहीं दिखाई देता है गांव रहनियांपुर में किसी प्रकार की सुख शांति ना रहे इसके लिए लेखपाल द्वारा पूरे प्रयास किए जा रहे हैं मेरा तो यह मानना है कि जिला प्रशासन सरकारी जमीन खलियान किसानों के घूर व अन्य प्रकार की जमीन के रखरखाव में लापरवाह होता दिखाई देता है जबकि सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ की पूर्व सरकार या नव गठन होने वाली सरकार में सिर्फ बुलडोजर बाबा की जय बोली जा रही है लेकिन जिला प्रशासन यह मानने को कतई तैयार नहीं है कहीं कोई किसी की पैतृक भूमि पर मकान बनाए खड़ा हो या फिर खलिहान की जमीन पर मकान बने खड़े हो या फिर घूरो की जगह जो कि 100 साल से ऊपर से पड रहे हैं उन पर मकान बनाने का प्रयास कर रहा हो वहां बुलडोजर बाबा नहीं चलेंगे जबकि शासन द्वारा उपरोक्त जमीनों के संरक्षण के लिए सीधे तौर पर जिलाधिकारी को जिम्मेदार माना गया है लेकिन यहां तो सरकार द्वारा कदए जा रहे दिशा निर्देशों जिलाधिकारी को सुनाई नहीं देता शायद हो सकता है कि जिला प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा हो जब अलग-अलग समुदाय के लोग लेखपाल द्वारा आबादी की जगह बता देने के बाद उपरोक्त जगह पर कब्जा करने के लिए आमादा हो जाए और खून खराबा करने से भी न कतराएं तो फिर सोचने का विषय है कि घटित होने वाली घटनाओं का जिम्मेदार जिला प्रशासन नहीं तो फिर कौन होगा l

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