पत्थर मारकर बेहोश किया फिर जिंदा फूंक दिया.., सामने आया 38 साल पुराना दंगे का सच

कानपुर के सिख विरोधी दंगों में अपनों को खोने वालों को 38 साल पुराना मंजर भूला नहीं है। मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआइटी) के सदस्य लुधियाना पहुंचे तो उनके सामने पीडि़तों के स्वजन ने बताया कि किस तरह दंगाइयों ने उनके दो भाइयों को पहले पत्थर मार कर बेहोश कर दिया फिर आग लगाकर जिंदा फूंक दिया।

सिख विरोधी दंगा की जांच कर रही एसआइटी (विशेष जांच दल) इन दिनों पंजाब दौरे पर है। एसआइटी के विवेचक उन लोगों की तलाश कर रहे हैं जो कि पीडि़त हैं या दंगाइयों के विषय में वह कुछ बता सकते हैं। बुधवार को एसआइटी की टीम लुधियाना में थी जहां उन्होंने तीन दंगा पीडि़तों से उनके बयान दर्ज कराए। जांच के दौरान दंगा पीडि़त सोसाइटी पंजाब के अध्यक्ष सुरजीत सिंह भी मौजूद थे। कानपुर से आई टीम फिलहाल लुधियाना के पास गुरुद्वारा आलमगीर साहिब में ठहरी है और गुरुवार को फिर पूछताछ करेगी।

31 अक्टूबर 1984 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पूरे देश में सिखों के विरुद्ध नरसंहार शुरू हो गया था। यह आग कानपुर में भी तेजी से भड़की, जिसमें दंगाइयों ने 127 सिखों को मौत के घाट उतार दिया था। इस प्रकरण में शहर के विभिन्न थानों में हत्या लूट और डकैती जैसी गंभीर धाराओं में 40 मुकदमे दर्ज हुए थे। जिसमें पुलिस ने 29 मामलों में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी 27 मई 2019 को इस मामले में प्रदेश सरकार ने एसआइटी का गठन किया था एसआइटी फाइनल रिपोर्ट लक्ष्य के 20 मुकदमों की अग्रिम विवेचना कर रही है। जिसमें 14 मामलों में तमाम साक्ष्य मिले हैं इस क्रम में एसआइटी की एक टीम पिछले दिनों पंजाब रवाना हुई थी।

पांच भाइयों का एक परिवार अशोक नगर में रहता था दंगे के दौरान दंगाइयों ने अमोलक सिंह और गुरबचन सिंह की हत्या कर दी थी। एसआइटी के सामने तीनों भाइयों ने जब 38 साल पुराना किस्सा बयां किया तो ऐसा लगा कि जैसे आज ही उनकी आंखों में उस दिन की तस्वीर बसी हुई है उन्होंने बताया कि सैकड़ों की भीड़ ने उनके घर पर हमला बोल दिया था अमोलक सिंह और गुरबचन सिंह दंगाइयों में घिर गए दंगाइयों की ओर से पथराव हुआ सिर पर पत्थर लगने से उनके दोनों भाई जमीन पर गिर पड़े इसके बाद दंगाइयों ने पास में ही खड़े सब्जी के ठेले और टट्टर बेहोश पड़े भाइयों के ऊपर डाल दिया और और मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। देखते ही देखते उनकी आंखों के सामने दोनों भाई मौत के घाट उतार दिए गए। एसआइटी सूत्रों के मुताबिक तीनों भाइयों के जल्द ही अदालत में भी बयान दर्ज कराए जाएंगे। पुलिस को दिए गए बयानों में दंगाइयों के तीन नए नाम सामने आए हैं इसके अलावा अन्य को उन्होंने पहचानने से इन्कार कर दिया तीनों दंगाई अशोक नगर के ही रहने वाले हैं और मृतक पक्ष के पड़ोसी हैं हालांकि एसआइटी ने यह नाम खोले नहीं हैं।

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