जिलाधिकारी अपडेट 26 मार्च 2022 कानपुर नगर ।
◆ वर्तमान वर्ष में ग्रीष्म ऋतु के आगमन के दृष्टिगत रखते हुए जनपद के पेयजल समस्या, विद्युत समस्या के त्वरित समाधान, मच्छर जनित संक्रामक रोग, पशुओं के संक्रमण सम्बन्धी बीमारियों की रोकथाम आदि हेतु समस्त सम्बन्धित अधिकारियों को पहले से ही समस्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने के दिए निर्देश।
◆ समस्त विभाग अपनी कार्यो योजना बनाते होंगे उक्त कार्यों को समय से सुनिश्चित कराएं ताकि आम जनमानस को सुविधा हो।
1-सिंचाई विभागः-
अधिशाषी अभियन्ता, निचली गंगा नहर, कानपुर नगर को निर्देशित किया जाता है कि नहरों, तालाबों की साफ-सफाई, एवं नहरों में जलापूर्ति करायी जाए ताकि पशु पेयजल की समस्या का निदान हो सके।
2-विद्युत विभागः-
अधिशाषी अभियन्ता,(विद्युत) गोविन्द नगर/चौबेपुर व घाटमपुर को निर्देशित किया जाता है कि ग्रामीण क्षेत्र के सभी नलकूपों के विद्युत ट्रांसफार्मर अनिवार्य रूप से ठीक करा दिये जाए। ग्रीष्म ऋतु में विद्युत लाइन टूट जाने पर आग लगने की समस्या को दृष्टिगत रखते हुए इसके बचाव हेतु सुदृढ व्यवस्था करायी जाए। ग्रामीण क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति सुचारू रूप से करायी जाए ताकि नलकूपों के माध्यम से तालाबों/पोखरों को भरा जा सके। इस कार्य हेतु अधिशाषी अभियन्ता, विद्युत गोविन्द नगर को नोडल अधिकारी नामित किया जाता है।
3-मनरेगा सम्बन्धी कार्यः-
उपायुक्त, श्रम रोजगार, कानपुर को निर्देशित किया जाता है कि ग्रामीण क्षेत्र में तालाबों की खुदाई के कार्य कराया जाए साथ ही तालाब व पोखर तक जलापूर्ति हेतु नालियों की खुदाई का कार्य मनरेगा से कराया जाए ताकि तालाबों/पोखरों तक निर्वाध जलापूर्ति करायी जा सके।
4-लघु सिंचाई विभागः-
सहायक अभियन्ता, लघु सिंचाई को निर्देशित किया जाता है ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा योजना से चेकडैम का निर्माण व तालाब खुदाई का कराया जाए ताकि अधिक से अधिक जल संरक्षण हो सके। साथ ही मनरेगा से डब्टेल वाटर पिट (पशु पेयजल हेतु) व रेनवाटर हार्वेस्टिंग का निर्माण कराया जाए। साथ ही निजी नलकूपों का संचालन भी सुचारू रूप से कराया जाए ताकि तालाबों/पोखरों को (जहां पर राजकीय नलकूप उपलब्ध नहीं है) भरा जा सके।
5-पंचायतीराज विभागः-
ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल हेतु हैण्डपम्पों की मरम्मत/रिबोर का कार्य अभियान चलाकर कराया जाए, साथ ही प्रतिदिन ग्राम पंचायतों में पेयजल समस्या को दृष्टिगत रखते हुए कन्ट्रोल रूम जनपद स्तर पर व विकास खण्ड स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करते हुए पेयजल की समस्या का त्वरित निस्तारण कराना सुनिश्चित करें। इस कार्य में अधिशाषी अभियन्ता जल निगम भी सहयोग प्रदान करेंगे। पेयजल प्रभावित ग्रामों में जलापूर्ति हेतु टैंकरों से पानी उपलब्ध कराये जाने की व्यवस्था की जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान चलाकर साफ-सफाई करायी जाए ताकि ग्रामीणों को संक्रामक बीमारियों से बचाया जा सके।
6-जल निगम विभागः- अधिशाषी अभियन्ता, द्वितीय प्रकल्प शाखा, कानपुर नगर को निर्देशित किया जाता है कि ग्रामीण क्षेत्र की पाइप पेयजल योजनाओं की विद्युत/यान्त्रिक दोष को ठीक कराते हुए सभी पाइप पेयजल योजनायें सुचारू रूप से संचालित करायी जाए। पाइप पेयजल योजनाओं से आच्छादित ग्रामों में शत-प्रतिशत जलापूर्ति करायी जाए। साथ ही यह भी अपेक्षा की जाती है कि ग्रामीण क्षेत्र के हैण्डपम्पों की मरम्मत/रिबोर किये जाने हेतु अवर अभियन्ताओं के माध्यम से तकनीकी सहयोग प्रदान किया जाए।
7-चिकित्सा विभागः-
मुख्य चिकित्सा अघिकारी, कानपुर नगर को निर्देश दिये जाते है कि ग्रीष्म ऋतु में मच्छर जनित संक्रमण के रोकथाम एवं बचाव हेतु आवश्यक दवाओं का छिडकाव कराया जाए। संक्रमण की रोकथाम हेतु चिकित्सकों की टीम गठित करते हुए ग्रामों की नियमित भ्रमण किया जाए। जिला पंचायतराज अधिकारी से समन्वय स्थापित करते हुए ग्रामीण स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति के फण्ड के उपयोग का वस्तुस्थिति की जांच की जाए।
8-पशुपालन विभागः-
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, कानपुर नगर को निर्देशित किया जाता है कि समस्त गौ आश्रय स्थलों में पशुओं हेतु पर्याप्त भूसा तथा पीने के पानी की उचित व्यवस्था सुनिश्चिित की जाए। साथ ही गौवंश को हरा चारा भी उपलब्ध कराया जाए। पेयजल हेतु गौ आश्रय स्थल में मनरेगा से तालाब का निर्माण कराया जाए साथ ही पशुओं के इलाज की सुदृढ व्यवस्था की जाए। इसके अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्र के पशुओं का भी टीकाकरण अभियान चलाकर कराया जाए।
9-गेहूॅं खरीद केन्द्रः-
जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी, कानपुर नगर को निर्देशित किया जाता है कि गेहूं क्रय केन्द्रों में किसानों के गेहूं खरीद हेतु केन्द्रों की स्थापना करायी जाए। साथ ही समय-समय पर केन्द्रों का भ्रमण भी किया जाए, जिससे किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या न हो।
10-मेड़बन्दी का कार्यः-
ग्रामीण क्षेत्र के खेतों में मेड़बन्दी का कार्य मनरेगा से कराया जाए जिससे भूमि का कटाव एवं जल संरक्षण हो सके।
11-अन्य बिन्दुः-
समस्त कार्यालयाध्यक्ष से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने-अपने कार्यालय में प्याऊ केन्द्र स्थापित करें। क्षेत्रीय प्रबन्धक, रोडवेज को निर्देशित किया जाता है कि जनपद के सभी बस स्टाप पर पेयजल हेतु प्याऊ केन्द्र की स्थापना की जाए। महाप्रबन्धक, जल संस्थान, कानपुर को निर्देशित किया जाता है कि सार्वजनिक स्थलों में प्याऊ केन्द्र स्थापित किये जाये, तथा पेयजल हेतु पर्याप्त टैंकरों की भी व्यवस्था की जाए।
उपरोक्त के अतिरिक्त समस्त अधिशाषी अधिकारी, नगर पालिका/नगर पंचायत व सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि ऐसे सूखाग्रस्त क्षेत्रों का चिन्हिकरण करके उन स्थलों की विशेष निगरानी करते हुए पेयजल की व्यवस्था कराना सुनिश्चित करें।
