पीयूष जैन कोर्ट में बोला, 35.38 करोड़ जुर्माना जमा करने के लिए है तैयार, डीजीजीआइ ने कहा ‘नो’
Tue, 29 Mar 2022
कानपुर के इत्र कारोबारी पीयूष जैन ने 35.38 करोड़ रुपये जुर्माना जमा करने के प्रार्थना पत्र पर महानिदेशालय जीएसटी इंटेलीजेंस (डीजीजीआइ) ने आपत्ति की तो न्यायालय ने सुनवाई के लिए 11 अप्रैल की तारीख दे दी । इत्र कारोबारी की ओर से बरामद रुपयों पर खुद से जुर्माना राशि तय कर कोर्ट से जमा करने की अपील की थी।
इत्र कारोबारी से बरामद 196 करोड़ रुपये और 23 किग्रा विदेशी मुहर लगा सोना बरामदगी के अलग-अलग दो मामलों में मंगलवार को सुनवाई हुई। सोना बरामदगी के मामले में वर्चुअल सुनवाई के दौरान महानगर मजिस्ट्रेट योगिता कुमारी की कोर्ट ने डीजीजीआई की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की अपील को मानते हुए 11 अप्रैल तक न्यायिक अभिरक्षा बढ़ा दी है। वहीं पीयूष की ओर से खुद 35.38 करोड़ रुपये की पेनाल्टी बनाकर दिए गए प्रार्थना पत्र पर एसीएमएम द्वितीय स्नेहा की कोर्ट में डीजीजीआई ने आपत्ति लगाई है जिस पर 11 को ही सुनवाई करने के आदेश हुए है। इत्र कारोबारी पीयूष जैन के आनंदपुरी और कन्नौज स्थित आवास से महानिदेशालय जीएसटी इंटेलीजेंस (डीजीजीआइ) की टीम ने 196 करोड़ रुपये बरामद किए गए थे। 23 किग्रा विदेशी मुहर लगा सोना बरामद किया गया था। दोनों ही मामलों की सुनवाई थी।
विशेष लोक अभियोजक अम्बरीश टंडन ने बताया कि रुपये बरामदगी के मामले में पीयूष जैन ने 24 मार्च को एसीएमएम-द्वितीय स्नेहा की कोर्ट में खुद 35.38 करोड़ की पेनाल्टी बनाकर और ब्याज अलग से जमा करने का इच्छा जताकर प्रार्थना-पत्र दिया था। उस पर सुनवाई के दौरान डीजीजीआई की ओर से आपत्ति दाखिल की गई। इसमें कहा गया कि अभी जांच चल रही है, फाइनल पेनॉल्टी अभी नहीं बन सकती है। जांच पूरी होते ही डीजीजीआइ कारण बताओ नोटिस जारी करेगी। उसमे पेनाल्टी व ब्याज का उल्लेख होगा। इसलिए इस तरह से पेनॉल्टी और ब्याज बनाकर जमा नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रार्थना-पत्र को लेकर अगली तारीख 11 अप्रैल तय की है। उधर सोना बरामदगी के मामले में डायरेक्टरेट आफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआइ) ने न्यायिक रिमांड खत्म होने से पहले उसे बढ़ाने की अपील की थी। जिस पर कोर्ट ने वर्चुअल सुनवाई करके उसे भी 11 अप्रैल तक बढ़ा दिया है। अब फिलहाल पीयूष को 11 अप्रैल तक जेल में ही रहना होगा।
