पद्मश्री डॉ गिरिराज किशोर जी की साहित्य जगत के पुरोधा थे
आज 7 जुलाई 2021 को कानपुर नागरिक मंच के तत्वाधान में मेंगा माल नरोना चौराहा माल रोड कानपुर में परमश्रद्धेय पद्मश्रीगिरिराज किशोर जी का 85 वां जन्मदिन मनाया नगर के प्रमुख समाजसेवी और गांधीवादी युवा लेखकों ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की इनके द्वारा रचित पुस्तक पहला गिरमिटिया पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने बताया कि गांधी जी ने अफ्रीका प्रवास को लेकर लिखा था उसी पर उन्हें 2007 में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने सम्मानित किया था और 1998 -2001में संस्कृत विभाग द्वारा भारत सरकार द्वारा एमेरिटस फैलोशिप भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान राष्ट्रपति निवास शिमला फैलो 1999
2001 व 23 मार्च 2007 साहित्य व शिक्षा के लिए पद्मश्री से विभूषित देश व प्रदेश द्वारा कई सम्मान मिले उपन्यास नाटक लघु नाटक लेख निबंध लिखकर समाज की चिंता जगाने का काम किया कहानी संग्रह शहर दर शहर ,हम प्यार कर ले, जगता रानी, ढाई घर, पेपर वेट ,रिश्ता, जैसी कहानियां बड़ी लोकप्रिय हुई लंबे समय तक वे आईआईटी कानपुर में कार्यरत रहे और आईआईटी में ही 1983 1997 के बीच रचनात्मक लेखन केंद्र की स्थापना दुखी और अध्यक्ष पद पर पदस्थ इंजॉय 1997 में वे सेवानिवृत्त होने के बाद पहला गिरमिटिया प्रकाशित हुई थी इसके बाद उन्हें गांधीवादी के रूप में देखा जाने लगा जब 2016 में कस्तूरबा गांधी की जीवनी लिखने का बात तो वह खुद तो अपने को गांधीवादी मानने लगे वे समकालीन राजनीतिक परिदृश्य चित्रण करते थे वह आकार जैसे गंभीर साहित्यिक पत्रिका के संपादक भी रहे

2021-07-07
