कानपुर नगर में आईडीए कार्यक्रम के सम्बन्ध में मीडिया कार्यशाला का आयोजन

कानपुर नगर मे दिनांक 12 जुलाई, 2021 से कोविड-19 के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए शुरू होगा मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (आईडीए) कार्यक्रम
– घर-घर जाकर स्वास्थ्य कर्मी खिलाएंगे फाइलेरिया की निःशुल्क दवा
फाइलेरिया रोग के उन्मूलन हेतु कानपुर नगर में कोविड-19 के दिशा.निर्देशों के अनुसार शारीरिक दूरी (दो गज की दूरी), मास्क और हाथों की साफ-सफाई का अनुपालन करते हुए समुदाय को फाइलेरिया या हाथीपांव रोग से बचाने के लिए दिनांक 12 जुलाई से 26 जुलाई, 2021 तक शुरू किये जा रहे मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (आईडीए) कार्यक्रम के सम्बन्ध में मीडिया की सक्रिय एवं महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा करने हेतु जनपद के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग एवं अन्य सहयोगी संस्थाओं यथा डॉ0 नित्यानंद ठाकुर, डब्ल्यूएचओ, डॉ0 मानस शर्मा, पाथ, श्री सुनील गुप्ता, पीसीआई, के साथ समन्वय स्थापित करते हुए, मीडिया सहयोगियों के साथ आज कानपुर नगर में मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में जनपद के मीडिया सहयोगियों ने प्रतिभाग लिया।
इस अवसर पर डॉ0 नेपाल सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि जनपद फाइलेरिया रोग के उन्मूलन के लिए संवेदनशील है और इसके लिए रणनीति बनाकर गतिविधियाँ संपादित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया या हाथीपांव रोग से बचाने के लिए दिनांक 12 जुलाई से 26 जुलाई, 2021 तक फाइलेरिया मुक्ति अभियान चलाया जायेगा जिसमें फाइलेरिया रोगी दवा के फायदे बताये जायेंगे और दवा दी जायेगी। उन्होंने फाइलेरिया के संबंध में जानकारी देते हुये बताया कि फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है, जिसे सामान्यतः हाथीपंाव के नाम से जाना जाता है। फाइलेरिया के लक्षण पैरो व हाथों में सूजन (हाथीपंाव) और हाइड्रोसील (अण्डकोष का सूजन) हो जाती है। यह रोग बहुत ही खतरनाक है। इसके लक्षण देर से मरीजों में पता चलते है, किसी भी व्यक्ति को संक्रमण के पश्चात् बीमारी होने में पाॅच से पन्द्रह वर्ष तक लग सकते है।
उन्होंने बताया कि एम0डी0ए0 के दौरान डीइसी व अल्बेन्डाजोल के साथ आइवर्मेक्टिन दिये जाने से माइक्रोलाइलेरिया जल्दी खत्म करने में मदद मिलती है। आइवर्मेक्टिन खुजली, व हुकवोर्म और जू जैसी समस्याओं के खात्मे में मदद करता है। इसके प्रयोग से पेट के अन्य खतरनाक परजीवी भी मर जाते है। उन्होंने बताया कि दो साल से छोटे बच्चे गर्भवती महिलाओं व गम्भीर रुप से बीमार व्यक्तिओं को यह दवा नही देना है। यह दवा खाली पेट नही खानी है। आइवर्मेक्टिन दवा पांच साल की उम्र के बाद ही दिया जाना है। हर पात्र व्यक्ति को अपने सामने ही दवा खिलाना है। आइवर्मेक्टिन ऊंचाई के आधार पर तथा डीइसी एवं अल्बेन्डाजोल उम्र के आधार पर देना है।
कार्यशाला के बढ़ते क्रम में डॉ0 ए0पी0 मिश्रा, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी वेक्टर बोर्नए ने जानकारी दी कि भारत को वर्ष 2021 तक फाइलेरिया से उन्मूलन की प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए इस अभियान में 688 सुपरवाइजर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में लगाये गये है तथा 28 रैपिड रिस्पांस टीमों का गठन किया गया है। यह अभियान संचारी रोग नियन्त्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत दस्तक अभियान के साथ फाइलेरिया उन्मूलन अभियान भी चलाया जायेगा। श्री ए0के0 सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि रक्तचाप, शुगर, अर्थरायीटिस या अन्य सामान्य रोगों से ग्रसित व्यक्तियों को भी ये दवाएं खानी हैं। सामान्य लोगों को इन दवाओं के खाने से किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं होते हैं और अगर किसी को दवा खाने के बाद उल्टी, चक्कर, खुजली या जी मिचलाने जैसे लक्षण होते हैं तो यह इस बात का प्रतीक हैं कि उस व्यक्ति के शरीर में फाइलेरिया के कृत्रिम मौजूद हैं, दवा खाने के बाद से ऐसे लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। ———————–

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