
प्रकाशनार्थ
कानपुर ,9 जून 2022.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा कानपुर में हुए बलवे के संबंध में मंडलायुक्त को ज्ञापन दिया गया।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नारायणी देवी स्थित धर्मशाला कार्यालय से जारी एक बयान में बताया गया है कि पार्टी का प्रतिनिधिमंडल मंडलायुक्त के कार्यालय में मंडलायुक्त से मिला और प्रतिनिधिमंडल ने 3 जून को कानपुर में हुए बलवे के संबंध में एक विस्तृत ज्ञापन एवं प्रस्ताव मंडलायुक्त को दिया।जिसमें उनसे यह भी अपेक्षा की गई कि उसकी एक प्रति माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को भी प्रेषित कर दी जाए। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश राज्य केंद्र की तरफ से पार्टी के प्रदेश सह सचिव कामरेड अरविन्दराज स्वरूप,जिला सचिव कामरेड राम प्रसाद कनौजिया, पार्टी की राज्य काउंसिल के सदस्य कामरेड ओम प्रकाश आनंद,श्रमिक नेता एवं पार्टी कार्यकारिणी के सदस्य कामरेड असित कुमार सिंह, किसान नेता कामरेड नवाब सिंह,पार्टी की जिला कार्यकारिणी के सदस्य कामरेड नीरज यादव एडवोकेट आदि अनेकों लोग उपस्थित रहे।
मंडलायुक्त को प्रस्तुत प्रस्ताव में कहा गया कि 3 जून 2022 को भारत के राष्ट्रपति, भारत के प्रधानमंत्री ,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा उत्तर प्रदेश की गवर्नर की मौजूदगी के बाद भी कानपुर में बलवा और हिंसा हुई ।जो अत्यंत दुख और चिंता की बात है ।किसी को भी बलवा अथवा हिंसा फैलाने का अधिकार भारत का संविधान प्रदान नहीं करता है। यह और भी चिंता की बात है कि देश के संवैधानिक पदों के शीर्ष व्यक्ति जब जिले में मौजूद थे तो तब यह घटनाएं हुई ।इससे बड़ा स्पष्ट है कि खुफिया तंत्र उस दिन पूरा फेल था।
प्रस्ताव में कहा गया कि जो भी लोग बलवे में संलग्न थे उन सब की गिरफ्तारी होनी चाहिए और देश के कानून के अनुसार ही उनसे व्यवहार भी किया जाना चाहिए, किसी भी नागरिक की वैद्य अचल संपत्ति पर बुलडोजर चलाना कानून सम्मत नहीं है और न ही वह कानून का राज कहलायेगा। वह पूरी तरह से अनैतिक एवं असंवैधानिक है ।किसी भी बेकसूर व्यक्ति को सिर्फ इसलिए नहीं पकड़ा जाना चाहिए कि उसका धर्म अमुक अमुक है।
प्रस्ताव में बुलडोजरवाद को भी लक्षित करते हुए कहा गया कि ऐसा करना विधि विधान के आधार पर चलने वाले देश के लिए अत्यंत शर्मनाक है। जिससे देश के लोकतंत्र में दूरगामी परिणाम होंगे। ऐसी ही परिस्थिति बन सकती हैं कि जैसे भाजपा प्रवक्ताओं ने निर्मित की है और जिसकी अंतरराष्ट्रीय जगत में घोर निंदा हुई और भारत का बड़ा अपमान हुआ। भारत के संविधान में नागरिकों की गरिमा को अक्ष्क्षुण माना गया है।
प्रस्ताव में कानपुर की वामपंथी , समाजवादी धर्मनिरपेक्ष एवं जनवादी शक्तियों को सचेत किया गया कि देश में शासक दल के कुछ बेता गण इलेक्शन को जीतने की वजह से सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने की चेष्टा निरंतर कर रहे हैं। नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल पर अगर उसी दिन शिकंजा कस दिया जाता जिस दिन 26 मई को उन्होंने अभद्र बयान दिया तो बहुत मुमकिन है कि कानपुर के बलवाईयो को मौका ना मिलता ।नूपुर शर्मा और जिंदल के निष्कासन के बाद दोनों ही पूर्व प्रवक्ताओं की गिरफ्तारी हो जानी चाहिए।
प्रस्ताव में कहा गया 80 बनाम 20 जैसे नारे में ज्वलनशील और हिंसा का पदार्थ है। उसी आधार पर बीजेपी के प्रवक्ताओं ने धार्मिक एवं पूजनीय महापुरुष के विरुद्ध अभद्र टिप्पणी की। भाजपा प्रवक्ताओं की उक्त चेष्टा को भारत के संविधान में दर्ज़ मूल्यों के आधार पर धर्मनिरपेक्ष एवं जनवादी शक्तियों शक्तियां ही ,वामपंथी शक्तियां ही मिलकर जनता को सचेत करते हुए गांधी जी के पथ पर चलते हुए रोक सकती हैं और सरकार को अपनी नीतियों में परिवर्तन करने का जन दबाव निर्मित कर सकती हैं।
प्रस्ताव में भारतीय जनता पार्टी के उस बयान को भी नोट किया गया जिसमें उसने कहा वह किसी भी धार्मिक व्यक्ति के अपपान की कड़ी निंदा करती है और ऐसे लोगों को बढ़ावा नहीं देती है।
प्रस्ताव में उम्मीद की गई की बीजेपी की सरकार अपने बयान को पूर्णरूपेण चरितार्थ करेगी।
प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से मांग की गई:-
कि,बलवाइयों को गिरफ्तार किया जाए चाहे वह जिस भी धर्म के हो। धर्म के आधार पर भेदभाव ने किया जाए और बेकसूरों की धर पकड़ ना हो।
कि ,बुलडोजरवाद बंद किया जाए। न्यायालय के आदेश लेकर ही अवैध संपत्ति पर भी कार्यवाही हो।
कि, नूपुर शर्मा तथा नवीन जिंदल पर कानून सम्मत कार्यवाही हो और सांप्रदायिकता भड़काने के जुर्म में उनको जेल भेजा जाए ।
कि, टीवी चैनलों को साम्प्रदायिकता फैलाने से रोका जाए।
कि,खुफिया तंत्र के फेल होने की जांच हो और सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो
