कानपुर में उपद्रव की साजिश में डी-टू गैंग के जिम्मे था खून खराबा, हयात की जुबां पर आया सरगना के भाई का नाम
Mon, 13 Jun 2022
कानपुर की नई सड़क पर तीन जून को जुमे की नमाज के बाद हुआ उपद्रव महज पूर्व भाजपा प्रवक्ता की विवादित धार्मिक टिप्पणी के विरोध में नहीं था। इसके पीछे दहशत फैलाकर चंद्रेश्वर हाता को खाली कराने की तैयारी के साथ पूरे शहर को हिंसा की आग में झोंकने की बड़ी साजिश थी। भीड़ के बीच रहकर खून खराबे का जिम्मा कुख्यात गिरोह डी-टू ‘गैंग’ को दिया गया था। पुलिस कस्टडी रिमांड में की जा रही पूछताछ में उपद्रव के मास्टर माइंड हयात जफर हाशमी ने यह सच्चाई उगली है। उसने डी-टू गैंग के सरगना अतीक के भाई अफजाल और बाबर का नाम लिया है। दर्जन भर ऐसे नाम सामने आए हैं जो गैंग के लिए काम करते हैं।
पहले से ही डी-टू गैंग के गुर्गों के पथराव में शामिल होने की आशंका थी। बताया था कि किस तरह धर्म के नाम पर जुटाई गई भीड़ में शत्रु संपत्तियों के खरीदार माफिया ने गिरोह के गुर्गों को शामिल कर उपद्रव कराया गया। अब हयात ने भी पूछताछ में इसको स्वीकार किया है। पुलिस को उसने बताया है कि सरगना अतीक का भाई अफजाल व शूटर बाबर गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ भीड़ में था। अफजाल 20-25 दिन पहले ही जेल से छूटा था। उसके खिलाफ 31 मुकदमे दर्ज हैं। डी-टू गैंग के शामिल होने का मकसद हर हाल में खूनी हिंसा को अंजाम देना था, ताकि चंद्रेश्वर हाते में दहशत पैदा की जा सके। इशारा साफ है कि इरादा चंद्रेश्वर हाते के ही किसी युवक की हत्या का था, लेकिन गैंग के शूटर अपना काम कर पाते, उससे पहले पुलिस ने मोर्चा संभाल कर योजना फेल कर दी।
क्या है डी-टू गैंग
डी का मतलब डिस्ट्रिक है, टू पंजी करण संख्या। ऐसा जिला स्तरीय गैंग जिसका पंजीकरण क्रमांक दो है। डी- टू गैंग का पंजीकरण नौ जून 1997 को हुआ। तब इसमें नौ सदस्य थे। सरगना तौफीक उर्फ बिल्लू था। गिरोह में उसके भाई अतीक, शफीक, इकबाल, रफीक और अफजाल के साथ ही इशरत, लईक कालिया और वीरेंद्र दुबे थे। गिरोह ने उस वक्त भाड़े पर कई हत्याएं कीं। बाद में एक विशेष वर्ग के युवाओं ने गैंग के नाम पर काम किया। शफीक ने मुंबई जाकर अंडर वर्ल्ड डान दाउद इब्राहिम के साथ काम किया। कई हत्याएं की। गिरोह के सदस्यों की संख्या जब बढ़ गई और कई राज्यों में इसका जाल फैला तो 19 जनवरी 2010 को इसे अंतरराज्यीय गैंग का दर्जा दे दिया गया।
महानगर में 144 गिरोह सक्रिय
डिस्ट्रिक क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के मुताबिक जिले में इस समय 144 गिरोह सक्रिय हैं। हालांकि पंजीकरण 189 गिरोह का हो चुका है। 45 गिरोह निष्क्रिय हो चुके हैं। आखिरी गिरोह का पंजीकरण डीआइजी प्रीतिंदर सिंह के कार्यकाल में 13 सितंबर 2020 को हुआ। पांच सदस्यीय इस वाहन चोर गिरोह का सरगना शिवम उर्फ शुभम है।
