अवैध कब्जों की आड़ में खूब फलफूल रहा है जरायम का काम
कानपुरः गुजैनी थाना क्षेत्र के रामगोपाल चौराहे से आंनद साउथ सिटी जरौली को जाने वाली सड़क के दोनों तरफ हरित पट्टी (ग्रीन बेल्ट) का निर्माण कानपुर विकास प्राधिकरण द्वारा कराया गया था। जिसका मकसद शहर में बढ़ रहे प्रदूषण स्तर में कमी लाना था एवम् गर्मी में बढ़ते तापमान के स्तर को कम करना था। लेकिन वहां पेड़ पौधों को जगह-जगह काटकर शातिर लोगों ने ग्रीन बेल्ट पर अवैध कब्जे कर लिये हैं। इतना ही नहीं कानपुर विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित की गई हरित पट्टी (ग्रीन बेल्ट) की बाउंड्री को तोड़कर अवैध दुकानों और झुग्गियों का निर्माण कर दिया जिसकी आड़ में जरायम का काम खूब चल रहा है।
स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा सब कुछ जानने के बावजूद भी इन पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। अवैध कब्जों की बात करें तो यह समस्या केवल यहीं नहीं है बल्कि पूरे शहर में है। हरित पट्टी की बाउंड्री को मौका पाते ही शातिर लोग तोड़ लेते हैं और अपना मनचाहा व्यापार शुरू कर देते हैं।
गौरतलब हो कि गुजैनी थाना क्षेत्र के चौ0 राम गोपाल यादव चौराहा के आसपास भी यही देखने को मिल रहा है और हाइटेंशन लाइन के नीचे देखते ही देखते बस्तियां बस गई और सड़कों के बीच में बनी पट्टी में भी अब अवैध बस्ती बसना शुरू हो गई है। ठेले वालों से लेकर खानपान की दुकानें तक लगा ली गई हैं। खास बात यह है कि इन्हीं दुकानों में बैठकी कर जरायम को बढ़ावा दिया जा रहा है। बताते चलें कि माननीय सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी द्वारा ग्रीन बेल्ट पर अवैध कब्जे खाली कराने के आदेश भी समय समय पर प्राधिकरणों को दिए गये हैं। फिर भी प्राधिकरण के अधिकारी सब कुछ जानने के बाद भी आंखों में पट्टी बांध कर बैठे रहते हैं।
सवाल यह उठता है कि प्राधिकरण की जमीन पर अवैध कब्जों को हटाने के लिए प्राधिकरण द्वारा अलग एक विभाग है फिर भी आज तक कोई अवैध कब्जा बगैर शिकायत किए या समाचार पत्रों में प्रकाशित किए बगैर यह लोग अवैध कब्जेदारों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करते? वहीं जब अवैध कब्जों अथवा अतिक्रमण सम्बन्धी प्रकरणों को मीडिया द्वारा खींचा जाता है तो खानापूर्ति करने के लिए नाममात्र की कार्यवाही कर दी जाती है। परिणामतः कुछ दिन बाद फिर उस जगह पर अवैध कब्जे हो जाते हैं। साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इस दिशा में कोई ठोस कार्यवाही न करने के कारण अवैध कब्जेदारों के हौंसले और मजबूत हो जाते हैं। चौ0 राम गोपाल चौराहा के आसपास के नजारे प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के जीते जागते प्रमाण हैं। हालांकि यह स्थिति केवल रामगोपाल चौराहे तक ही सीमित नहीं है बल्कि पूरे कानपुर नगर की है। शहर मुख्य सड़कें तक अवैध कब्जों अथवा अतिक्रमण से अछूती नहीं हैं।

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