रेमडेसिवर घोटाले में दोषी पाए गए मेडिकल स्टाफ नर्स,

कानपुर। हैलट अस्पताल प्रशासन रेमडेसिवर घोटाले में दोषी पाए गए मेडिकल स्टाफ नर्स, कुछ वार्ड बॉय व सफाई कर्मियों को निकाल कर व कुछ खास लोगों को बचाने की कोशिश में अपनी वाहवाही लूटने चाह रहा था। मगर हैलट प्रशासन के लिए यह कार्यवाही अब गले की हड्डी बन गई है। ये सभी लोग शुक्रवार से भूख हड़ताल पर बैठे है। सोमवार सुबह भूख हड़ताल पर बैठे दो आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की हालत फिर बिगड़ गई। जिन्हें आनन फानन में हैलट इमरजेंसी में एडमिट कराया गया है।

हैलट अस्पताल में चल रही इस हड़ताल में शुक्रवार से लेकर सोमवार तक आठ लोगों की तबियत बिगड़ चुकी है, लेकिन इन लोगों को मानाने के लिए न तो जीएसवीएम के प्राचार्य डॉ संजय काला आये है और नाही कोई हैलट से आया। सोमवार को जिन चार लोगों की हालत बिगड़ी है उनको हैलट इमरजेंसी में भर्ती करवाया गया है, जिसमे से तीन लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉ प्रशांत सिंह ने बताया, इन तीनों की शुगर और बीपी काफी काम हो गया था। इन तीनों को ड्रिप लगा कर इलाज किया जा रहा है।

इन नर्सों और वार्ड बॉय को मनाने के लिए ने तो प्रशासन की तरफ से कोई आया और नाही हैलट अस्पताल से कोई आया। इन गरीब स्टाफ नर्स, वॉर्ड ब्वॉय, सफाई कर्मचारी को बुधवार को प्राचार्य के आदेश पर निलंबित कर दिया गया था। जिसके बाद शुक्रवार से यह लोग भूख हड़ताल पर बैठे है।

रेमडेसिवीर घोटाले में सबसे अहम नोडल अधिकारी होता है। नोडल अफसर ही रेमडेसिवीर इंजेक्शन अलॉटमेंट की देखरेख करता है और इंजेक्शन को डॉक्टर का परचा देख कर अलॉट भी करता है। हड़ताल पर बैठी नर्सिंग स्टाफ कुमुद ने बताया कि, जिस समय इंजेक्शन जारी हुए उस समय हैलट के डॉक्टर को ही नोडल अधिकारी बनाया गया था। उसी को बचाने के लिए हम लोगों को निलंबित किया गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *