कानपुर देहात में कोरोना से जूझ रहे पिता की मौत और फिर खुद कोरोना से बीमार। हर तरफ से संकट व निराशा के बीच भी जिला अस्पताल के चिकित्सक डाक्टर श्रीप्रकाश पाठक ने सेवाधर्म को महत्व दिया। तीन सप्ताह में स्वस्थ होकर ड्यूटी पर लौट आए औ फिर से इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की जान बचाने में जुट गए। कोरोना काल में मुसीबतों के बाद भी उनकी हिम्मत व जीवटता को सभी सलाम करते हैं।
कानपुर नगर कल्याणपुर निवासी डाक्टर श्रीप्रकाश पाठक यहां जिला अस्पताल में इमरजेंसी चिकित्सक हैं। उनके पिता कोविड से बीमार हुए इसके बाद भी वह इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों की सेवा में जुट रहे। इस दौरान वह किसी मरीज के इलाज करते समय संक्रमित हो गए। पांच मई को उनके पिता की मौत हुई और अगले ही दिन वह संक्रमित पाए गए। एक तरफ पिता की मौत अंदर से खाए जा रही थी दूसरी तरफ खुद संक्रमित और परिवार को संभालना भी था। ऐसे मुश्किल दौर में उन्होंने किसी तरह से हिम्मत बांधी कि कोरोना को हराकर परिवार को भी सुरक्षित रखेंगे और फिर से मरीजों की सेवा में जुटेंगे। तीन सप्ताह के भीतर ही वह स्वस्थ हुए और फिर से ड्यूटी पर लौटे व मरीजों की सेवा का कार्य शुरू कर दिया। वह कहते हैं कि वह समय बहुत ही संघर्ष व चिता के बीच गुजरा। इमरजेंसी में कोई मरीज आता है तो वह यह नहीं सोचते कि यह संक्रमित होगा या नहीं उन्हें केवल उसकी जान बचानी है यह जेहन में रहता है। किसी के घर परिवार का कोई अपना बचता है और उसकी मुस्कान देखकर ही उन्हें सब कुछ मिलता है।
