एक्सीडेंट करने वाली कार में नहीं था कोई पांचवा व्यक्ति
कानपुर गंगा बैराज पर 28 अक्तूबर को हुए सड़क हादसे में दो किशोरों की मौत के मामले में पुलिस ने खुली आंखों में धूल झोंकने का काम किया है। सामने आया हैं कि दो किशोरों की जान लेने वाली कार में चार नाबालिगों के अलावा पांचवें वयस्क के भी होने की कहानी फर्ज़ी है। वहीं घटनास्थल के आसपास के दुकानदारों का भी यही कहना है कि कार में पांच नही बल्कि चार नाबालिग थे।बता दें कि घटनास्थल के आसपास के दुकानदारों ने इन्ही चार नाबालिगों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया था। वहीं पुलिस ने उस पांचवें व्यक्ति को ही कार चालक बताकर बाकी पर 304 ए में रिपोर्ट दर्ज करके थाने से ज़मानत दे दी थी। इसके अलावा नाबालिग कार चालक के डॉक्टर पिता ने समझौते के लिए 15 लाख रुपये पीड़ित परिवारों को देने की बात कही थी। यहां भी सच्चाई यह है कि सिर्फ एक पीड़ित परिवार ने 1.90 लाख रुपये मिलने की मानी है। दूसरे परिवार का कहना है कि एक पैसा नहीं मिला।ज्ञात हो कि में डीसीपी प्रमोद कुमार ने डॉक्टर से जब पूछताछ की तो उसने बताया कि मृतक के परिजनों को 15 लाख रुपये एक बिचौलिये आज़ाद सिंह के ज़रिये दिए थे। दोनों परिवार को 7.50 -7.50 लाख रुपये देने थे। हालांकि बिचौलिये ने आशीष के परिवार को केवल 1.90 लाख रुपये दिए। सागर के परिजनों ने रुपये मिलने की बात से इन्कार कर दिया। पीड़ितों का आरोप है कि डॉक्टर द्वारा दिए गए पैसों को बिचौलिये और पुलिस ने आपस में बांट लिया। वहीं मामले में डीसीपी ने जांच के आदेश दिए हैं।गौरतलब है कि पुलिस ने डॉक्टर के बेटे और उसके दोस्तों को बचाने के लिए धाराओं में खेल किया। पुलिस ने डॉक्टर के बेटे को नामजद करते हुए तीन अज्ञात के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने से मौत की धारा 304ए में रिपोर्ट दर्ज की। इससे नाराज़ परिजनों ने पोस्टमार्टम के बाद चौकी के सामने शव रखकर प्रदर्शन किया। तब पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि आरोपियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की धारा 304 बढ़ाई जाएगी। हालांकि पुलिस ने 304ए की धारा में ही चालान किया और थाने से छोड़ा।
