कानपुर

 

जिला अस्पताल से मरीज कानपुर हैलट के लिए रेफर होते है।लेकिन बीच मे गायब कहा हो जाते है। अस्पताल में बनी पुलिस चौकी की कार्यशैली भी संदेह में

जिला अस्पताल में प्राइवेट अस्पताल और जिम्मेदारो के कारखासो का पूरा कब्जा है जिसे ही कोई भी मरीज आता है तो कारखास अपने अपने अस्पताल में भेजने में जुट जाते है और तय होने पर उनके रहनुमाओं की एम्बुलेंस आती है मरीजो को अपने अस्पताल ले जाती है।और यह सब जिला अस्पताल में बनी पुलिस चौकी खुली आँखों से देखती रहती है।नही तो मानक विहीन अस्पतालों को नुमाइंदों का अड्डा इमरजेंसी के आसपास कैसे रहता है कैसे अंदर आती है प्राइवेट एम्बुलेंस यही से शूरू होता है गरीब मरीजो से लूट का कारोबार जिसमे आधा हिस्सा जिम्मेदारो और उनके कारखासो का होता है और आधा मानक विहीन प्राइवेट अस्पतालों का होता है।मानक विहीन अस्पतालों मे लापरवाही की भी पराकाष्ठा पार होती है और मरीजो की मौत भी हो जाती परिजन हंगामा भी करते पुलिस भी आती लेकिन जब शैय्या है कोतवाल तो डर काहे का मजबूरी में दुखी परिवार के पास समझौते के अलावा कोई रास्ता बचता ही नही है।

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