वात दोष “वायु” और “आकाश” इन दो तत्वों से मिलकर बना है। वात या वायु दोष को तीनों दोषों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। हमारे शरीर में गति से जुड़ी कोई भी प्रक्रिया वात के कारण ही संभव है। चरक संहिता में वायु को ही पाचक अग्नि बढ़ाने वाला, सभी इन्द्रियों का प्रेरक और उत्साह का केंद्र माना गया है। वात का मुख्य स्थान पेट और आंत में है।ऋतु परिवर्तन से होने वाले रोगों ज्वर वात व्याधि जैसे बुखार खांसी,जोड़ जोड़ घुटनों कमर पीठ दर्द शरीर में दर्द से ग्रशित है जड़ी बूटी विशेषज्ञ राजेश शुक्ला ने भगवान धन्वंतरि जयंती की पूर्व संध्या में बताया कि गलत आहार विहार एवं शरीर की प्रित रोधक क्षमता कम होने से जल्दी जल्दी जुकाम बुखार,खांसी होना है इसके लिए प्राकृतिक जड़ी बूटी काढ़े चिरायता,कुटकी, तुलसी नीम,गिलोय,पीपर ,कालीमिर्च,अडूसा ,मुलेठी हरिद्रा का काढ़ा गुड़ मिलाकर या शुगर होने पर बगैर गुड़ के ले।।राजेश शुक्ला ने बतायावात दोष “वायु” और “आकाश” इन दो तत्वों से मिलकर बना है। वात या वायु दोष को तीनों दोषों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। हमारे शरीर में गति से जुड़ी कोई भी प्रक्रिया वात के कारण ही संभव है। चरक संहिता में वायु को ही पाचक अग्नि बढ़ाने वाला, सभी इन्द्रियों का प्रेरक और उत्साह का केंद्र माना गया है। वात का मुख्य स्थान पेट और आंत में है।राजेश शुक्ला जड़ी बूटियों के विशेषज्ञ ने बताया वात व्याधि जड़ी बूटियां दशमूल, रा सना,पुनर्नवा, गिलोय अनंत मूल चो प चीनी,गोखरू,अश्वगंधा, बला का काढ़ा ताजा गुड़ मिलाकर चिकित्सक के परामर्श से एवं दर्द के स्थानों में भीम सेनी कपूर सत,पिपरमेंट सत,अजवाइन सत को एक साथ बराबर मिला कर दर्द के स्थानों में मले।राजेश शुक्ला ने सभी रोगी निरंतर चिकित्सक के संपर्क में रहे और सभी प्रयोग चिकित्सक के परामर्श से करे तात्कालिक लाभ जड़ी बूटियों का रोगों में दिखाई देता है।।

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