कानपुर स्मार्ट सिटी में एक ऐसा नाला है जो आजादी के पहले से परेशानी का सबब बना हुआ है। शहर में जाने कितने ही मेयर आए वार्ड में जाने कितने ही पार्षद आए और विधानसभा में कितने विधायक आए, लेकिन इस नाले की गंदगी और नाले की मुसीबत से निजात नहीं दिला सके। यहां रहने वाली 2 लाख से अधिक की आबादी और तीन वार्डों की जनता को यह 120 साल पुराना कागजी माहौल डॉट नाला आफत बन गया है।यहां के लोग सप्लाई के पीने वाले पानी में मिले हुए नाले के पानी को पीने के लिए मजबूर है। इस वार्ड के पार्षद भी नाले से परेशान हो गए हैं। पार्षद 6 सालों से लगातार नगर निगम से गुहार लगा रहे हैं ,लेकिन इस मुसीबत से निपटने का कोई रास्ता नहीं निकल सका। अब उनका कहना है कि क्षेत्र की जनता जब उनसे सवाल पूछती है तो उनके पास इसका कोई जवाब नहीं होता है।
कानपुर के कर्नलगंज वार्ड नंबर 97 कागजी मोहाल इलाके में आजादी के पहले से बना हुआ नाला बकरमंडी ढाल तक आया हुआ है। इस नाले की दशा यह है कि गंदे पानी के नाले के साथ ही पीने वाले पानी की पाइपलाइन साथ में ही पड़ी हुई है। नाले की स्थिति प्रतिदिन ऐसी हो जाती है कि नाला उफना कर सड़क और नालियों को भर देता है और उसी के भीतर पीने के पानी वाली सप्लाई लाइन भी डूब जाती है। इस कारण पीने वाला पानी इलाके में सीवर की गंदगी का मिला हुआ सप्लाई होता है।वार्ड 97 के पार्षद पति हाजी अमीम ने बताया कि इससे पहले वह खुद इस वार्ड से पार्षद थे। वर्तमान में उनकी पत्नी यहां से पार्षद हैं। उन्होंने बताया कागजी मोहाल डॉट नाला तीन वार्डो को प्रभावित करता है, जिनमें वार्ड 97 वार्ड 03 वार्ड 110 इससे निजात दिलाने के लिए अपने कार्यकाल में बहुत जद्दोजहद की गई लेकिन कोई परिणाम नहीं मिला। नमामि गंगे योजना के तहत करोड़ों रुपए खर्च करके यहां टीम भी लगाई गई थी लेकिन टीम अधूरा काम करके चली गई और नाले की स्थिति जस की तस रह गई।
