हलाल सर्टिफाइड फूड प्रोडक्ट के बैन के बाद भी बिक रहा है। खाद्य विभाग के अफसर बैन के आदेश को लेकर संजीदा नहीं हैं। वह सिर्फ खानापूर्ति कर अपने काम को पूरा कर रहे हैं।उन रेस्टोरेंट और दुकानों में छापे मार रहे हैं, जहां यह आइटम बिकते नहीं। वहीं जहां यह प्रोडेक्ट बेचे जा रहे हैं, वहां विभाग की टीम पहुंची नहीं। अफसर बताते हैं कि हलाल सर्टिफाइड फूड प्रोडक्ट को लेकर कई जगह छापेमारी की गई, लेकिन यह प्रोडक्ट कहीं नहीं मिला।दरअसल हलाल सर्टिफाइड प्रोडक्ट महंगे होते हैं और आम जन मानस इससे नहीं खरीदते हैं। केक, टॉफी, कैडबरी कॉफी आदि विदेशी आइटम पर यह लोगो मिलेंगे। इन प्रोडक्ट के पीछे इंग्लिश और हिंदी के स्थान पर अन्य भाषा में सब कुछ लिखा होता है। इससे इसकी पहचान की जा सकती है।योगी सरकार हलाल सर्टिफिकेट प्रोडक्ट बैन के आदेश के बाद ही बडे व्यापारियों ने खेल शुरू कर दिया। मॉलों और दुकानों में लगे स्टॉकों पर स्टिकर लगा दिया। इससे सर्टिफिकेट का चिह्न छिप जाए और इससे बेच सके।उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेट से जुड़े फूड उत्पाद पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रतिबंध से जुड़ा आदेश जारी किया। इस आदेश के मुताबिक हलाल सर्टिफिकेट वाले खाद्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण एवं विक्रय पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाता है। आदेश में कहा गया है कि यदि उत्तर प्रदेश में किसी को हलाल सर्टिफिकेट वाली दवाओं, प्रसाधन सामग्रियों का विनिर्माण, भंडारण, वितरण एवं खरीद-बिक्री करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।दरअसल हलाल सर्टिफिकेट लिखे प्रोडेक्ट की बिक्री सबसे अधिक मुस्लिम क्षेत्रों में होती है। मेस्टन रोड, बिसाती बाजार, रहमानी मार्केट, चमनगंज, बेकनगंज समेत कई क्षेत्र में यह सर्टिफाइड प्रोडेक्ट बिक रहे हैं। जेड स्क्वायर स्थित बिग बाजार में हलाल सर्टिफाइड प्रोडेक्ट बेचे जा रहे हैं।

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