देश के प्रथम क्रॉन्तिकारी शहीद मातादीन भंगी का जन्मदिन मनाया गया

 

कानपुर, डा0 अम्बेडकर सामाजिक सेवा समिति द्वारा सुदर्शन नगर चुन्नी गंज कानपुर मे शहीद सम्राट मातादीन भंगी का जन्मदिन मनाया गया जिसमे संगोष्ठी कर मातादीन भंगी के द्वारा देश की आजादी के लिये किये गये कार्य बताया

चमन खन्ना ने बताया की शहीद मातादीन भंगी जी का जन्म 29 नवंबर 1825 के दशक में उत्तर प्रदेश के जनपद मेरठ शहर में हुआ कुछ वर्षों के बाद बंगाल में जाकर रहने लगे!मतादीन भंगी जी खलीफा इस्लामुद्दीन जो पलटन नंबर 70 में बैंड बजाते थे उनके द्वारा मातादीन जी को मल युद्ध यानी पहलवानी करना सिखाया गया इससे समाज में वह जाने पहचाने जाने लगे। एक दिन गॉव से मंगल पाण्डे सैनिक की वर्दी पहन के निकले उन्हे प्यास लगी तब मातादीन भंगी ने अपना लोटा दे उसकी प्यास बुझाई बाद मे मंगल पाण्डे के जब पता चला कि मातादीन भंगी अछूत है तो वह उन पर धर्म भ्रष्ट करने पर चिल्लाये जिस पर मातादीन भंगी द्वारा बताया गया कि एक इंसान को छू लेने से आपका धर्म भ्रष्ट हो जाता है और गाय सूवर की चर्बी से बने कारतूस को जब दॉतो से तोड़ कर निकालते हो तो उससे आप का धर्म भ्रष्ट नही होता। मंगल पाण्डे को जब ये जानकारी हुई तो वह अंग्रेजो की नौकरी छोड़ धर्म बचाने के लिये विद्रोह पर उतर गये जिस के बाद अंग्रेजो ने मातादीन भंगी जी को विद्रोह करने के आरोप मे फॉसी की सजा दी!कार्यक्रम शेखर भारतीय, गोविन्द नारायण, देव कुमार, शिव कुमार, हरिशंकर वर्मा, ब्रिजलाल भारतीय, देशराज बाल्मीकि, कौशल बाल्मीकि, संदीप बाल्मीकि, नितिन बाल्मीकि, ज्ञान भारतीय, मोहन दिलावर, दीपक बाल्मीकि (बहादुर), बैजू बाल्मीकि, संध्या, अरुण कुमार, दीपक, रौनक, सन्तोष सेठ, श्रेष्ठ खन्ना आदि

अध्यक्षता हरीशचन्द्र सागर व संचालन निलेश भारतीय ने किया!

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