अधिवक्ता सम्मान से खिलवाड़ बर्दास्त नही किया जाएगा पंडित रवीन्द्र शर्मा

आज अधिवक्तागण पुलिस कमिश्नरेट के मुकदमो की सुनवाई तहसील के बगल में बने कमिश्नरेट न्याय भवन में किए जाने के लिए आयुक्त कार्यालय पहुंचे । जहां ये सूचना मिलते ही कि महिला थाने में लिखाया गया है कि अधिवक्ताओं का प्रवेश वर्जित ये सुनते ही अध्यक्ष वहीं सीढ़ियों पर बैठ गए । इसपर पुलिस आयुक्त ने तत्काल बाहर आ वार्ता की जिसपर लायर्स एसोसिएशन अध्यक्ष पं रवीन्द शर्मा ने पुलिस आयुक्त आर के स्वर्णकार को बताया एक तरफ योगी सरकार अधिवक्ता सम्मान/ कल्याण को बढ़ाने के लिए प्रयत्नशील है वही दूसरी तरफ पुलिस ऐसे वाक्य लिख अधिवक्ताओं के सम्मान को गिराने का कार्य कर रही है ये देश के बीसियों लाख अधिवक्ताओं का अपमान है इसको तत्काल हटाया और ये जिसने किया है उसके खिलाफ जांच कर कार्रवाई करें नही तो अधिवक्ता सम्मान के लिए अधिवक्ता समाज सड़कों पर उतरेगा जिसकी जिम्मेदारी शासन की होगी इस पर पुलिस आयुक्त ने कहा कि हम इसको दिखवा तत्काल मिटवाते हैं हमारे लिए अधिवक्ता सम्मान सहित सभी का सम्मान सर्वोपरि है।

इसके उपरांत श्री शर्मा ने पुलिस आयुक्त को बताया कि कमिश्नरेट बनने के बाद गुंडा एक्ट 107/116/145 आदि के मुकदमों की सुनवाई पुलिस लाइन में होती थी कचहरी बगल में होने से वादकारियों को सारे प्रपत्र और अधिवक्ताओ की सुलभता थी फिर जोनवार सुनवाई की जाने लगी। जहां आवश्यक कागजात तक नही मिलते है कागजात लेने वादकारियों को कचहरी जाना आना पड़ता है और कचहरी से अधिवक्ताओं को लाने ले जाने में बहुत अधिक व्यय करना पड़ रहा है। जो वादकारी का हित सर्वोच्च सिद्धांत के विपरीत है और जोनवार अधिवक्ताओं को भी आने जाने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ सरकार सस्ते और सुलभ न्याय के लिए निरंतर प्रयत्नशील है। वही जोनवार सुनवाई होने से वादकारियों को पहले से अधिक खर्च करना पड़ रहा है। जो सरकार की मंशा के विपरीत है।

श्री शर्मा ने ज्ञापन देते हुए पुलिस आयुक्त से आग्रह किया कि वह जोनवार सुनवाई के अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर वादकारियों को सस्ते और सुलभ न्याय के लिए गुण्डा एक्ट 107/116 /145 cr p c आदि के मुकदमों की सुनवाई तहसील के बगल में बने कमिश्नरेट न्याय भवन में किए जाने का आदेश कर वादकारियों और अधिवक्ताओं को दिन प्रतिदिन होने वाले कष्ट से छुटकारा दिलाएं।

पुलिस आयुक्त ने ज्ञापन प्राप्त कर कहा कि हम वादकारियों और अधिवक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए आदेश करेंगे।

प्रमुख रूप से अरविंद दीक्षित संजीव कपूर कंचन गुप्ता मधु यादव पवन अवस्थी राकेश सिद्धार्थ गौरव शुक्ला आयुष शुक्ला मो तौहीद मनोज बाली अमर दीप वर्मा राकेश सिद्धार्थ अशोक शर्मा शिवम गंगवार इंद्रेश मिश्रा आदि रहे।

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