कानपुर
श्रम विभाग के पोर्टल में सेंध के मामले में पकड़े गए पांच जालसाजों से पुलिस को चौंकाने वाली जानकारियां मिली है। सूत्रों की मानें तो कानपुर में फर्जी आवेदनों के अप्रूवल से संबंधित 196 ट्रांजेक्शन हुए। ज्यादातर पैसा ऐसे एकाउंट में पहुंचा, जो केवल डिजिटल स्वरूप में हैं। इससे पहले जालसाज कई जिलों के ग्राहक सेवा केन्द्रों के जरिए ऐसी ठगी कर चुके हैं। अभी तक कि जांच में पता चला है कि इसका दायरा सात से आठ जिलों में है और ठगी की रकम 1 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
कानपुर में एक एफआईआर दर्ज हुई तो हड़कंप मचा विभाग ने अंदरूनी छानबीन शुरू कर दी है। छानबीन में सामने आया कि श्रम विभाग के लिए कार्यरत बाहरी सहयोगी ने जाली डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से सारा खेल खेला है पकड़े गए जालसाजों ने कम से कम पांच और जिलों में ऐसी ही ठगी की बात कबूली है ।
पुलिस उपायुक्त अपराध आशीष श्रीवास्तव ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि सारा मामला श्रम विभाग की कन्या विवाह अनुदान योजना के तहत किया गया पाकिस की जांच में पाया गया कि मुख्य आरोपी एक प्रेमी जोड़ा है उदित मिश्रा और नैंसी ठाकुर ने कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से इस पूरी घटना को अंजाम दिया था । ये सभी आवेदन सहारनपुर की सीएचसी से कराए गए थे और अकाउंट एयरटेल के पेमेंट बैंक में मुरादाबाद में खुलवाया गया था । कुल पांच पुरुष और एक महिला को गिरफ्तार किया गया है ।
