कानपुर- में मोहर्रम की दस तारीख यानि यौम-ए-आशूरा के मौके पर शुक्रवार सुबह से ही मजलिसों और मातम का दौर इस वक्त लगा हुआ है. सुबह के वक्त मजलिस और ताजिया दफन करने पहुंचे अकीदतमंदों के साथ पुलिस की झड़पें हो गई. उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद दो-दो लोगों को ताजिया दफ्नाने के लिए अंदर जाने की इजाजत दे दी गई.
इन सबके दौरान पहले तो को पैगीयों कर्बला तक जाने की इज्जत तक नहीं दी गई थी लेकिन बिना घंटी को बांधे पैगी बड़ी कर्बला पर जा पहुंचे. इसके बाद कर्बला में जियारत के लिए जाने पर वो आपस में भिड़ते हुए नजर आए। पहले तो पुलिस ने उन्हें इसको लेकर चेतावनी दी और फिर बाद में बड़ी कर्बला बंद कर दी। सुबह टकराव की स्थिति आने से बाल-बाल बचने के बाद कर्बला का ताला खोल दिया गया। बड़ी कर्बला के साथ छोटी कर्बला ग्वॉलटोली में भी भीड़ इक्ट्ठी न होने इस शर्त के आधार पर ताजिया दफनाने की इज्जत दे दी गई इसके अलावा शिया हजरात ने ग्वॉलटोली मकबरा, पटकापुर नवाब साहब का हाता, बेकनगंज, भैंसिया हाता, बाबूपुरवा, बेगमपुरवा, रोशन नगर, जाजमऊ और जूहीं में घरों में रहकर मातम किया. इतना ही नहीं पटकापुर में तो मातम के वक्त कमां यानि सिरों पर तलवार से खराश लगाने का भी काम किया गया. इस दौरान घरों के अंदर भी कुछ लोगों ने छुरी और जंजीरों का मातम भी किया. यहां तक की चमनगंज के हाशमी मेडिकल हाल में तबर्रुकात की जियारत तक कराई गई. उनका ये दावा है कि उनके पास इमाम हुसैन की निशानियां हैं l
