स्मृति शेष : उस वक्त स्कूटर से कानपुर आने को तैयार हो गए थे कल्याण सिंह
जिस समय तक पार्टी सत्ता में नहीं आई थी और जब सत्ता में आ चुकी थी तब भी वह आकर कार्यकर्ताओं के साथ उनके सुख दुख जानते रहे। पूर्व महापौर रवींद्र पाटनी के मुताबिक 1985-86 में वह युवा मोर्चा में कानपुर के जिलाध्यक्ष थे
पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह बेहद जीवट वाले शख्स थे। वे कार्यकर्ताओं के साथ किसी भी स्थिति में रहने को तैयार थे। एक बार तो वह लखनऊ से भारतीय जनता युवा मोर्चा के तत्कालीन कानपुर जिलाध्यक्ष रवींद्र पाटनी के साथ स्कूटर पर ही चलने को तैयार हो गए थे। हालांकि, बाद में उन्होंने खुद ही वह निर्णय टाल दिया और ट्रेन से आए। उस समय वह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे। शनिवार को ऐसे हर दिल अजीज पूर्व मुख्यमंत्री के निधन की खबर सुनकर लोग रो पड़े।
कल्याण सिंह के साथ कानपुर के लोगों की यादें अब भी ताजा हैं। जिस समय तक पार्टी सत्ता में नहीं आई थी और जब सत्ता में आ चुकी थी, तब भी वह आकर कार्यकर्ताओं के साथ उनके सुख दुख जानते रहे। पूर्व महापौर रवींद्र पाटनी के मुताबिक, 1985-86 में वह युवा मोर्चा में कानपुर के जिलाध्यक्ष थे। उस समय स्कूटर लेना था। बुकिंग के छह माह बाद स्कूटर देहरादून से लखनऊ आया। वह स्कूटर लेने लखनऊ गए तो पार्टी कार्यालय भी चले गए। वहां कल्याण सिंह कानपुर आने के लिए निकल रहे थे। उन्होंने पूछा कि कैसे आना हुआ तो बताया कि स्कूटर लेने आए हैं। इस पर वह तपाक से बोले तो क्यों न मैं भी साथ में स्कूटर से ही चलूं। हालांकि, बाद में वह स्कूटर की जगह ट्रेन से आए।
और उसके बाद कभी मुख्यमत्री के रूप में कानपुर न आ सके : मुख्यमत्री के रूप में कल्याण सिंह का अंतिम बार 29 नवंबर 1999 को कानपुर आने का प्लान बना था। भारतीय जनता पार्टी के क्षेत्रीय सह मीडिया प्रभारी अनूप अवस्थी के मुताबिक, वह मुख्यमंत्री के रूप में उनके तिलकोत्सव में आ रहे थे। प्रोटोकाल जारी हो चुका था। सारे अधिकारी सुबह से लगे थे, लेकिन वो यहां न आकर अयोध्या चले गए और वहीं से इस्तीफा दे दिया। उसके बाद वह फिर मुख्यमंत्री नहीं बने।
लाठीचार्ज के विरोध में आए थे
कानपुर : पूर्व विधायक व पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश सोनकर के मुताबिक, एक बार सपा सरकार के दौरान उनके ऊपर लाठी चार्ज हुआ। कल्याण सिंह को इसकी जानकारी हुई तो वह तुरंत ही लखनऊ से कानपुर आ गए। वह उस समय मुख्यमंत्री नहीं थे, लेकिन अधिकारियों से नाराजगी जताई।
अब 10 मिनट तो रुकना ही होगा : पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश राय 2007 में उनसे मिलने गए। पहुंचते ही कल्याण सिंह बोले, और अध्यक्ष जी कैसे हो। दिनेश राय के मुताबिक, उन्होंने कहा कि 10 मिनट हों तो अपनी बात रखूं। कल्याण सिंह ने कहा कि 10 मिनट तो नहीं हैं। इस पर वापस लौटते हुए कहा कि जब आपके पास 10 मिनट होंगे, तब आऊंगा। इस पर उन्होंने तुरंत समय दिया। एक मिनट में बात पूरी हो गई। इसके बाद जब वह लौटने लगे तो उन्होंने कहा कि अब 10 मिनट लिए हैं तो 10 मिनट रुकना ही होगा।
कार्यकर्ता क्या सोचते हैं, वे जानना चाहते थे : भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डा. श्याम बाबू गुप्ता के मुताबिक, जब वह कानपुर के जिलाध्यक्ष तो कल्याण सिंह आए थे। सुबह के अखबारों को पढऩे के बाद छपी खबरों को लेकर आगे क्या प्रतिक्रिया देनी है, यह खुद लिखते थे। वह अक्सर उनसे मिलने वाले कार्यकर्ताओं से भी अपनी प्रतिक्रिया शेयर करते थे। वह जानना चाहते थे कि वे क्या सोचते हैं।
