केले का पेड़ भगवान विष्णु का जितना प्रिय है माता लक्ष्मी को उतना ही अप्रिय. घर से दरिद्रता और रोगों को दूर भगाने वाला ये फलदायक ओर लाभकारी पेड़ घर में लगाने से माता लक्ष्मी अत्यंत क्रोधित हो जाती हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि यह पेड़ अपने साथ घर के अंदर दरिद्रता भी लेकर आता है.

 

पौराणिक कथा: आज भी कई मंदिरों में, भंडारे में या दक्षिण भारतीय खाने में आज भी केले के पत्तों का प्रयोग किया जाता है.

लेकिन इतने सारे आयुर्वेदिक गुण और पवित्र केले का पेड़ घर में ना लगाने की सलाह क्यों दी जाती है? क्या है मां लक्ष्मी की केले के पेड़ से नाराजगी के पीछे का कारण? कथाओं के अनुसार जब भगवान नारायण और माता लक्ष्मी के विवाह के समय देवताओं ने लक्ष्मी जी की बहन अलक्ष्मी की दरिद्रता का बहुत उपहास किया था. देवताओं के इस उपहास का देवी अलक्ष्मी को बहुत ही ठेस पहुंची थी. जब दरिद्रता(अलक्ष्मी) भगवान विष्णु के पास पहुंची तब उन्होंने दरिद्रता को यह वरदान दिया कि आज के बाद से आप केले के पेड़ में निवास करेंगी और जो भी भक्त साफ मन से केले के पेड़ की पूजा करेगा वह मुझे प्रिय होगा. इसके बाद तभी से केले के पेड़ में दरिद्रता का वास हो गया.

 

वास्तु शास्त्र: इसी कारण से केले का पेड़ घर में लगाने से दरिद्रता स्वयं ही घर में वास कर लेती हैं जिस कारण घर में अनेकों दिक्कतें और परेशानी आने लगती है.

 

इसलिए केले के पेड़ को घर में ना लगाने की सलाह दी जाती है. शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि केले का पेड़ घर में लगाने से सारा धन किसी न किसी कारण से व्यर्थ ही खर्च होने लगता है. इसी कारण से वास्तु शास्त्र में केले के पेड़ के नीचे बैठकर खाना ना खाने की भी सलाह दी जाती है.

 

आयुर्वेद: आयुर्वेद के अनुसार केले के पत्ते पर भोजन करने से शरीर को किसी तरह की बीमारी नहीं लगती और शरीर रोग और कष्ट मुक्त रहता है. घर में केले का पेड़ लगाना अशुभ होता है लेकिन किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में केले का वृक्ष सबसे अधिक शुभ माना जाता है. इस कारण से वास्तु शास्त्र में यह सलाह दी गई है की अगर कोई व्यक्ति केले का पेड़ लगाना चाहता है तो घर के बाहर किसी खुली जगह पर लगा सकता है.

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