02 जनवरी को मोहसिन ए मिल्लत हाफिज मोहम्मद हलीम साहब की याद में हलीम डे मनाया
कानपुर हलीम मुस्लिम कालेज ओल्ड ब्वायज एसोसिएशन व हलीम मुस्लिम इण्टर कालेज के प्रधानाचार्य व स्टाफ ने संयुक्त रूप से 02 जनवरी 2025 को मोहसिन ए मिल्लत हाफिज मोहम्मद हलीम साहब की याद में हलीम डे का एक प्रोग्राम हलीम डे के रूप में मनाया गया जिसमें सुबह उनके नाम पर कुरान ख्वानी व फातिहा के एहतिमाम के साथ हलीम कालेज की तारीख पर ओल्ड ब्वायज के चेयरमैन हाजी मोहम्मद सलीस ने रोशनी डालते हुए कहा कि आज से 110 वर्ष पूर्व 1914 ई० में जनाब फजलुर्रहमान बकील साहब ने पानियर हाऊस हीरामन पुरवा कानपुर में एक इलमी पौदा मुस्लिम स्कूल के नाम से कायम किया जो कुछ समय पश्चात परेड पर नवाब इब्राहिम की एक इमारत में मुनतकिल हो गया। उस समय तक कक्षा 08 तक था जिसे हाफिज मोहम्मद हलीम साहब ने 1916 में हाईस्कूल कक्षा तक 09.08.1919 में मान्यता दिलायी। तालीमी जरूरत के अनुसार स्कूल की निजी इमारत के वास्ते उन्होने अपने निजी असर व रसूख से प्रदेश के पहले लेफ्टिनेन्ट गवर्नर सर जेम्स मेस्टन फिर उसके बाद सर हरकोट बटलर को किराये की इमारत में बुलाया ताकि एक वसीतरीन जगह प्राप्त की जा सके। हलीम मुस्लिम हाईस्कूल किराये की इमारत से अपनी मौजूदा इमारत में 1923 ई० में ट्रासफर हुआ। हाफिज हलीम साहब ने अपनी लाइब्रेरी जो हजारो किताबो की थी, पूरी हलीम मुस्लिम हाईस्कूल को प्रदान कर दी। इस मौके पर प्रोग्राम की अध्यक्षता कर रहे हलीम मुस्लिम इण्टर कालेज के प्रधानाचार्य आजिम हुसैन ने हाफिज हलीम साहब को खिराजे अकीदत पेश की।
ख्वाजा ग़रीब नवाज़ र.अ. ने अपना पैगामे मुहब्बत इनसानियत मानवता हमदर्दी भाईचारा मसावात को आम किया (मौलाना मोहम्मद हाशिम अशरफ़ी)
