इस मंदिर की अनोखी है कहानी, नवरात्री में लगता है भक्तों का ताँता 12 पुत्रियों से जुड़ी है इस मंदिर की रोचक कहानी
कानपुर, नवरात्रि के पहले दिन शहर के सभी मंदिरों में काफी भीड़ देखने को मिलती है लेकिन शहर का यह एक ऐसा मंदिर है जहां पर श्रद्धालुओं का जन सैलाब देखने को मिलता इस मंदिर की कहानी बड़ी ही रोचक है. 12 पुत्रियों के घर से भागने को लेकर इस मंदिर की कहानी है. मान्यता है कि इस मंदिर में जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से जो कुछ मांगता है वह उसे मिलता है.
लाखों की तादात में आते है भक्त दर्शन के लिए लगती है लाईन
कानपुर, शहर के कई मंदिरों में से एक है कानपुर का बारा देवी मंदिर है नवरात्रों में यहां अत्यधिक भीड़ लगती है. प्रशासन इस मंदिर सुरक्षा की दृष्टि से कई दिन पहले ही तैयरियों में लग जाता है. पुरुष और महिलाओं की अलग लाइन लगाई जाती है ड्रोन कैमरे व सीसीटीवी कैमरो से सुरक्षा निगरानी की जाती है, भक्त दर्शन के लिए कई घंटे तक लाइन में खड़े रहते हैं और पूजा अर्चना करके ही जाते हैं.
सौ से अधिक ड्रोन कैमरे और पीएसी के हवाले रहती है सुरक्षा ब्यवस्था
कानपुर, बारादेवी मंदिर में लाखों भक्तों की सुरक्षा का जिम्मा प्रशासन के कंधों पर रहता है सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से करीब 100 से अधिक कमरे मंदिर परिसर वा आसपास में लगाए जाते हैं. और भक्तों को किसी प्रकार की कोई दिक्कत ना हो इसके लिए सुरक्षा की जिम्मेदारी पीएसी के हवाले की जाती है. कई कंपनी पीएसी भी यहां पर 24 घंटे तैनात रहती है वा सीनियर अधिकारी भी मंदिर का निरीक्षण करने के लिए आते रहते हैं.
500 साल पुराना है बारादेवी मंदिर
कानपुर, यहां के स्थानीय निवासी बताते है की ये प्रसिद्ध 12 देवी मंदिर दुर्गा जी का मंदिर है और करीब 500 साल पुराना यह मंदिर है. यह मान्यता है कि इस मंदिर में नवरात्र में चुनरी बाँधने से सभी मनोकामनाएं देवी मां पूर्ण करती हैं इसलिए इस मंदिर में नवरात्रि में भक्तों की काफी भीड़ देखने की मिलती है
ऐसा पड़ा बारा देवी मंदिर का नाम बारा देवी
कानपुर, कानपुर के जूही में स्थित इस प्रसिद्ध मंदिर का नाम बारा देवी क्यों पड़ाशायद ही किसी को पता हो ऐसा कहा जाता है
देवी मां के दर पर एक साथ 12 बहने मूर्ति बन गई थी,बताया जाता है कि एक पिता की 12 बेटियां थी. जो पिता से किसी बात को लेकर नाराज हो गई थी और वह जूही में बने इसी मंदिर में चली गई थी जो बाद में मूर्तियां बन गई थी. उसके बाद बेटियों के श्राप से पिता भी मूर्ती बन गए थे. इस कारण इस मंदिर का नाम बारादेवी पड़ा और आज भी उन मूर्तियों की पूजा की जाती है. इस वजह से इसे बारादेवी मंदिर कहा जाने लगा.
