अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने ज्ञापन सौंपा

 

 

कानपुर, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति कानपुर ने बनारस मे एक छात्रा के साथ हुए सामूहिक बलात्कार के खिलाफ हाथों मे नारे लिखे हुए प्ले कार्ड और बैनर लेकर पुलिस कमिश्नर आफिस के सामने विरोध प्रदर्शन करते हुए राज्यपाल को सम्बोधित करके एक ज्ञापन सौंपा गया इस कार्यक्रम में जिला सचिव सुधासिंह,अध्यक्ष नीलम तिवारी,उपाध्यक्ष रजिया नकवी,मालती यादव,वंदना शर्मा,धनपती,यादव,सरोज आदि मौजूद रहीं। प्रदेश की महिला व सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि व जागरूक नागरिक आपके संज्ञान में उप्र में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते हिंसा के मामलों की ओर आकर्षित करना चाहते हैं ।‌ उत्तर प्रदेश सरकार दुरुस्त कानून व्यवस्था का दावा करती है किन्तु आये दिन हिंसा की वीभत्स घटनाएं इस दावे पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करतीं हैं । इस संबंध में हम प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हाल में हुई एक सामूहिक बलात्कार की वीभत्स घटना की ओर दिलाना चाहते हैं ।पीड़िता दिनांक 29 मार्च को गायब हुई और 4 अप्रैल को पुलिस ने उस बहुत बदहवास स्थिति में बरामद किया ।पीड़िता के अनुसार उसको अलग अलग स्थानों पर ले जाकर 23 लड़कों ने एक हफ्ते तक उसे हवस का शिकार बनाया ।यह बहुत ही भयानक घटना है जिसने हम सभी को प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर बेहद चिंतित और भयभीत भी किया है । इसके पहले वाराणसी में ही इसी वर्ष बिहार की छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद पुलिस प्रशासन द्वारा उसका पोस्टमार्टम भी नहीं करवाया गया और उसके शव को कब्जे में लेकर घर वालों की मर्जी के बगैर जल्दबाजी में अंतिम संस्कार भी कर दिया गया । इसी प्रकार दो वर्ष पूर्व बीएचयू कैम्पस में एक छात्रा के सामूहिक बलात्कार के आरोपियों को सत्ता दल की नज़दीकियों के कारण तमाम सबूत होने के बाद भी कई महीने बाद गिरफ्तार किया गया और आज पुलिस द्वारा बनाए गये कमजोर केस के कारण वे सभी जमानत पर जेल से बाहर हैं ।

महोदया, वाराणसी प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है और यदि वहां महिलाओं की सुरक्षा का यह हाल है तो प्रदेश के अन्य हिस्सों में हम क्या उम्मीद करेंगे । अपराधियों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं ? यह कानून व्यवस्था पर बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह है । अपराधियों को कहीं न कहीं राजनैतिक संरक्षण भी मिलता है जिसके कारण उन्हें कानून का डर नहीं रहता । एक आम नागरिक की पुलिस थानों में सुनवाई नहीं होती है । उसकी शिकायत को नज़रंदाज़ कर दिया जाता है ।

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