✨ घरेलू कामगार महिलाओं के सशक्तिकरण की ओर एक मजबूत कदम

 

सखी केंद्र और सखी घरेलू कामगार संघ द्वारा प्रेरणादायक सेमिनार का आयोजन

 

दिनांक: 8 जुलाई 2025

स्थान: सदुल्लापुरवा, कानपुर

 

सखी केंद्र और सखी घरेलू कामगार संघ के संयुक्त प्रयास से आज सदुल्लापुरवा में घरेलू कामगार महिलाओं के लिए एक सशक्तिकरण सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन महिलाओं के आत्मसम्मान, अधिकारों और जागरूकता के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ। कार्यक्रम का सफल संचालन सखी केंद्र की जुझारू कार्यकर्ता माया सिंह ने किया।

 

कार्यक्रम की शुरुआत प्राची त्रिपाठी द्वारा प्रस्तुत प्रेरणादायक गीत “दरिया की कसम, मौजों की कसम, यह ताना-बाना बदलेगा” से हुई। इस गीत ने महिलाओं के मन में बदलाव की नई चेतना और आत्मबल का संचार किया।

 

सखी केंद्र की महामंत्री श्रीमती नीलम चतुर्वेदी ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा,

🗣️ “घरेलू कामगार महिलाएं समाज की रीढ़ हैं। आपके हाथों में सिर्फ घर नहीं, बल्कि पूरे समाज का भविष्य संवरता है। अपनी ताकत को पहचानिए और अपने हक के लिए डटकर खड़ी होइए।”

उन्होंने महिलाओं से अभ्युदय योजना और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया और भरोसा दिलाया कि सखी केंद्र हर संघर्ष में उनके साथ खड़ा रहेगा।

 

वरिष्ठ कार्यकर्ता पुष्पा तिवारी ने कहा कि महिलाएं नौकरी शुरू करने से पहले अपनी मजदूरी, छुट्टियों और काम के घंटे स्पष्ट रूप से तय करें और यदि कहीं भी अन्याय हो तो डटकर आवाज़ उठाएं।

 

सखी केंद्र की काउंसलर अर्चना पांडे ने कहा,

🌸 “चुप्पी तोड़ो, अन्याय के खिलाफ बोलो। हम हर कदम पर आपके साथ हैं। चाहे घरेलू हिंसा हो या कार्यस्थल का उत्पीड़न, सखी केंद्र हर पीड़ित महिला के लिए न्याय की आवाज़ बनेगा।”

 

इस अवसर पर श्रम विभाग के श्री अखिलेश ने महिलाओं को उनके श्रमिक अधिकारों, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना, मातृत्व लाभ योजना और श्रम विभाग में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महिलाएं अब ₹3000 मासिक पेंशन का लाभ उठा सकती हैं और अपने अधिकारों के लिए आगे आ सकती हैं।

 

वन स्टॉप सेंटर की प्रतिनिधि इशिता ने महिलाओं को कानूनी सहायता, FIR, ऑनलाइन शिकायत, और 1076 हेल्पलाइन नंबर की जानकारी दी, जिससे महिलाएं किसी भी अत्याचार के विरुद्ध साहसपूर्वक कदम उठा सकें।

 

इस परिवर्तनकारी कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं जिनमें विशेष रूप से प्रभावती, माया कुरील, अनुपम, अहाना, मोनी, पायल, शकुंतला, राजेंद्री, उर्मिला, गुड्डन सहित अनेक महिलाएं उपस्थित रहीं। सभी ने अपने अनुभव साझा किए और एक-दूसरे को हौसला दिया।

 

👉 यह सेमिनार न केवल महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला था, बल्कि यह एक नई शुरुआत, एक नई सोच और एक नई दिशा का प्रतीक भी बन गया।

 

सखी केंद्र का यह प्रयास महिलाओं को आत्मनिर्भर, जागरूक और सशक्त बनाने की दिशा में अनवरत जारी रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *