शुक्रवार 5 सितंबर 2025 को, दोपहर दो बजे से जमीअत उलमा-ए-शहर कानपुर की कयादत में

 

 

 

कानपुर, पिछले 113 वर्षों से लगातार, यानि 1913 से हर साल इस्लाम के पैगम्बर हजरत मुहम्मद (स0अ0व0)के यौमे विलादत (जन्म दिवस) 12 रबीउल अव्वल के मुबारक मौके पर निकाला जाने वाला एशिया का सबसे बड़ा जुलूस-ए-मुहम्मदी(स0अ0व0), इस साल भी परंपरानुसार 12 रबीउल अव्वल 1447 हिजरी, शुक्रवार 5 सितंबर 2025 को, दोपहर दो बजे से जमीअत उलमा-ए-शहर कानपुर की कयादत में रजबी ग्राउंड (परेड ग्राउंड) रवायती रूट(नवीन मारकेट चैराहा) से निकाला जाएगा। इसकी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और इस साल यह जुलूस ए मुहम्मदी (स0अ0व0)का 113वां साल होगा (इंशा अल्लाह)। जमीअत उलमा उत्तर प्रदेश के नायब सदर मौलाना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह कासमी, जमीअत उलमा शहर कानपुर के सदर डॉ. हलीमुल्लाह खान, नायब सदर मौलाना नूरुद्दीन अहमद क़ासमी मौलाना अनीस खान मौलाना मोहम्मद अकरम जामई, सेक्रेटरी जुबैर अहमद फारूकी कारी अब्दुल मुईद चैधरी मौलाला अंसार अहमद जामई मुफती इज़हार मुकर्रम कासमी ने आज जमीअत बिल्डिंग में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक संयुक्त बयान में यह जानकारी दी। मौलाना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह कासमी ने बताया कि जुलूस-ए-मुहम्मदी (स0अ0व0) की अपनी एक सुनहरी तारीख है। जब 1913 में भारत की आजादी की जंग जोर-शोर से चल रही थी, तब यह जुलूस निकाला जाना शुरू हुआ था। इस जुलूस में कानपुर के मुसलमानों और हिंदुओं समेत सभी धर्मों के लोगों ने शामिल होकर आपसी भाईचारे और एकता का प्रदर्शन किया और अंग्रेजों की साजिशों को नाकाम किया। उस वक्त अंग्रेजों ने हिंदू-मुस्लिम और सिख एकता को तोड़ने के लिए सांप्रदायिक दंगे भड़काने की कोशिशें कीं, लेकिन वे अपनी नापाक योजनाओं में सफल नहीं हो सके। सचिव जुबैर अहमद फारूकी ने पत्रकारों से अपील की कि वे जनता तक यह संदेश पहुंचाने में मदद करें कि जुलूस-ए-मुहम्मदी (स0अ0व0)सद्भावना, शांति और एकता का संदेश है। चाहे वह हिंदू-मुस्लिम एकता हो या फिर इस्लाम के विभिन्न वर्गों और सम्प्रदायों के बीच हो। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद जमीअत उलेमा के सभी जिम्मेदारों ने विशेष रूप से कानपुर के मुसलमानों से अपील की कि इसी दौरान हमारे हिंदू भाइयों का भी त्योहार है, इसलिए हमें आपसी प्यार, मोहब्बत और भाईचारे के साथ इस त्योहार का भी ध्यान रखना है। धैर्य और सहनशीलता का प्रदर्शन करना है और हमारी तरफ से कोई ऐसा काम नहीं होना चाहिए, जिससे किसी दूसरे को तकलीफ हो। यही अल्लाह के नबी हजरत मुहम्मद (स0अ0व0) की शिक्षाएं हैं और यही आपका सच्चा श्रद्धांजलि होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *