कानपुर

 

शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन आज मां शैलपुत्री का विधि विधान पूर्वक पूजन अर्चन किया गया। नवरात्र के प्रथम दिन आज बिरहाना रोड स्थित मां वैभव लक्ष्मी मंदिर में माता के समक्ष 251 किलो की अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित की गई।यह अखंड ज्योति पूरे नवरात्र जलेगी और यहां आने वाले भक्तों को मां का आशीर्वाद प्रदान करती रहेगी। मंदिर के पुजारी ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष की कन्याओं के नाम की पर्ची निकल गई थी और इस बार अनन्या मिश्रा नामक कन्या के नाम की पर्ची निकली थी उस कन्या का विधि विधान पूर्वक पूजन करने के बाद उसके ही हाथों से ज्योति जलवाई गई। नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की जाती है पर्वतराज हिमालय के यहां पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। पूर्व जन्म में यह प्रजापति दक्ष की कन्या थी तब इनका नाम सती था इनका विवाह भगवान शंकर जी से हुआ था प्रजापति दक्ष के यज्ञ में सती ने अपने शरीर को भस्म कर अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया ।पार्वती और हेमवती भी उन्हीं के नाम हैं। उपनिषद की एक कथा के अनुसार इन्हीं ने हेमवती स्वरूप से देवताओं का गर्व भंजन किया था नवदुर्गा में प्रथम शैलपुत्री का महत्व और शक्तियां अनंत हैं। नवरात्र पूजन में प्रथम दिन इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। इस दिन उपवास में योगी अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थित कर साधना करते हैं।

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