भगवान विष्णु ने रावण का उद्धार करने के लिए धरती पर अवतार लिया
मर्यादा में रहकर भी असत्य पर सत्य का परचम लहराया
ग्रंथों में रामायण का एक अपना अलग महत्व है जिसमें मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने लंका पति रावण , लंकेश और दशानन कई नामों से प्रख्यात है , रावण जो भोलेनाथ जी के अनन्य भक्तों में एक है जिसने भोलेनाथ को खुश और मनाने के लिए अपने 10 सर उनको काट कर उनको अर्पित किए जिस पर भोलेनाथ ने उसको मनवांछित फल दिया और रावण को अपनी भक्ति व आशीर्वाद दिया लेकिन जैसा कि विधि के विधान में लिखा है की जब ताकत हद से ज्यादा होती है तो वो अहंकार के रूप में बदल जाती है ,तीनों लोकों में रावण से ज्यादा ज्ञानी , बुद्धिमान , ताकतवर और शक्तिशाली कोई नहीं था ,जिसकी वजह से राक्षसों का तीनों लोक में बहुत ज्यादा अत्याचार था , यहां तक ऋषि मुनि और धर्मात्माओं को भी राक्षस उनकी हत्या और नरसंहार के रहे थे ।पूरे ब्रह्माण्ड में त्राहि त्राहि मची हुई थी तब देवताओं और बड़े बड़े ऋषि मुनियों ने विष्णु भगवान के पास जा कर प्रार्थना की कि हे प्रभु हम सबको रावण के अत्याचार से बचाए तब भगवान विष्णु ने उन सभी देवताओं को आश्वाशन दिया और कहा मै धरती में अयोध्या के राजा दशरथ के यहां पुत्र बन के जन्म लूंगा और उसके बाद रावण का वध कर देवताओं ऋषि मुनियों और तीनों लोको को रावण के अत्याचारों व कुरीतियों मुक्त कराऊंगा और तब मर्यादा पुरूषोतम भगवान श्री राम का जन्म अयोध्या क राजा दशरथ के यहां जन्म लिया और शुरुवात हुई रामायण की जिसका विश्लेषण तुलसीदास जी ने रामायण ग्रंथ को लिखा जिसमें प्रभु श्री राम चंद्र जी के जन्म से रावण के वध के साथ उनके जीवन की सभी लीलाओं का वर्णन किया ।असत्य पर सत्य की जीत की गाथा को रामायण नामक ग्रन्थ नाम से लिखा गया है ।
