सर सैयद अहमद खान -: तालीम का चिराग़

 

 

 

वो सिर्फ एक शख्स नहीं, एक जज़्बा थे। वो एक मिसाल थे, जिन्होंने ज़माने के तग़य्युर को पहचाना और एक अहम पैगाम दिया कि – तालीम ही तरक्की की कुंजी है।सर सैयद अहमद का पैगाम साफ था – : आओ, इल्म हासिल करो। तालीम को अपना मकसद बनाओ। उनका मानना था कि तालीम ही वह ज़रिया है जो इंसान को गुमराही से बचाती है और हकीकी निजात दिलाती है। उनकी कोशिशें मुश्किलात से भरी थीं, लेकिन उन्होंने हौसला नहीं हारा।आज, उनके यादगार दिन (यौमें पैदाईश 17 अक्टूबर) पर, उनका पैगाम हम सबके लिए यही है -:अपनी जड़ों से मुहब्बत रखो, लेकिन तरक्की की राह पर चलने से कभी गुरेज़ न करो। तालीम की इस मशाल को हमेशा जलाए रखो, क्योंकि यही वह चिराग़ है जो आने वाली पीढ़ियों का रास्ता रोशन करेगा।

सर सैयद सिर्फ एक नाम नहीं, एक सोच है, एक इंकलाब है डा निसार अहमद अध्यक्ष शहीद वीर अब्दुल हमीद सोशल वेलफेयर सोसाइटी उ प्र

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