कानपुर प्रख्यात आध्यात्मिक एवं समाज सेवी संस्था मानव उत्थान सेवा समिति की शाखा कल्याणपुर द्वारा प्रेम लान में जनसमूह को संबोधित करते हुए हंस मंदिर प्रभारी साध्वी चंदन बाई जी, व साध्वी दुर्गा बाई जी, साध्वी मुदिता बाई जी ने अपने भजनों एवं सत्संग प्रवचनों से भक्तों को भाव विभोर कर दिया तत्पश्चात श्री सतपाल जी महाराज की परम शिष्य हरिद्वार से पधारे महात्मा श्री ज्ञान शब्दानंद जी ने संबोधित करते हुए कहां की सर्वव्यापी परम सत्ता हम सबके हृदय में निवास करता है। उन्होंने बल देते हुए कहा मानव का हृदय ही सर्वश्रेष्ठ मंदिर है, उन्होंने समझाया कि बाहर के जितने भी मंदिर है वह सब मानव निर्मित है लेकिन इस हृदय रूपी मंदिर को स्वयं परमात्मा ने बनाया है, इसलिए यह सबसे श्रेष्ठ और सबसे पवित्र है। महात्मा जी ने आगे कहा कि परमात्मा परम प्रकाश स्वरूप है और उसे बाहरी नेत्रों से देखना संभव नहीं है परमात्मा के वास्तविक स्वरूप का दर्शन और साक्षात्कार केवल ज्ञान नेत्रों द्वारा ही संभव है। उन्होंने स्पष्ट किया ज्ञान नेत्र सबके अंदर है लेकिन समय के सद्गुरु की कृपा के बिना यह ज्ञान चक्षु नहीं खुलता जब तक तत्वदर्शी सदगुरु देव जिज्ञासु के ज्ञान नेत्र को खोल देते हैं तभी वह अपने हृदय मंदिर में ज्योति स्वरूप परमात्मा का दर्शन और साक्षात्कार करता है । अध्यात्म की शक्ति से ही मानव का नैतिक, चारित्रिक, विकास संभव है। हमारा भारत अध्यात्म ज्ञान की शक्ति से ही पुनः विश्व गुरु बनेगा।

उपरोक्त कार्यक्रम में मुख्य रूप से शैलेंद्र पाल, शिव सागर कुशवाहा, विवेक कुशवाहा, संतराम निषाद राजाराम ,रामकुमार पाल आदि भक्त उपस्थित रहे।

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