अपराध की जानकारी के बावजूद ‘समझौता स्वीकृति’ से नहीं थम रहा अपराध

 

शहर में अपराध और अव्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बताया जा रहा है कि अधिकांश थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्र में चल रहे अपराधों की पूरी जानकारी है, बावजूद इसके “पुलिस मित्र” और “समझौते” के नाम पर कई मामलों को दबा दिया जाता है।जहां शहर में खुलेआम शराब सेवन पर कार्यवाही की गई है तो वहीं अरमापुर थाना क्षेत्र और फजलगंज थाना क्षेत्र विजय नगर में फलमंडी के आगे स्थित अंडा मीट मांस बिरयानी की दुकानों में मयखाने संचालित आख़िर किसके आशीर्वाद से संचालित किए जा रहे हैं।उच्च अधिकारियों द्वारा लगातार अपराध पर नियंत्रण और यातायात व्यवस्था को सुधारने के निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन अरमापुर और फजलगंज थाना क्षेत्र इन निर्देशों को दरकिनार कर अपनी मनमानी पर उतरे दिखाई दे रहे हैं।शहर में फुटपाथों पर अवैध कब्ज़े, सड़कों पर बढ़ती अराजकता और अवैध टेम्पो स्टैंड संचालन को लेकर जिम्मेदार मौन हैं। यह मौन कहीं न कहीं प्रशासनिक मिलीभगत या दबाव का संकेत देता है।योगी सरकार और पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि फुटपाथ कब्ज़ा और अवैध वाहन संचालन पर सख़्त कार्रवाई की जाए, मगर स्थानीय थाना स्तर पर इन आदेशों की अनदेखी की जा रही है।अरमापुर थाना क्षेत्र को लेकर तो आरोप यह तक हैं कि यहाँ कई मामलों को दबा दिया गया और फर्जी “गुंडा एक्ट” के तहत कार्रवाई कर निर्दोषों को निशाना बनाया गया। वहीं क्षेत्र में दहशत फैलाने वाले कनकटहा के राकेश नट जैसे अपराधी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।सूत्रों का कहना है कि थाना प्रभारी न केवल क्षेत्र में सक्रिय अपराधियों पर कार्रवाई से बच रहे हैं, बल्कि मीडिया में आने वाली खबरों की जानकारी भी उन तक पहुंचाने का काम कर रहे।

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