*अयोध्या के राजा हनुमान, राजपाट दिया मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम ने*
*जब हम बजरंगबली की जय बोलते हैं तो समझो एक आस उम्मीद की पुकार लगा रहे होते है। और आज श्री हनुमानजी दिन है। इस महामारी मे हमारे लिए एक डॉक्टर के शिवाय। दूसरी उम्मीद श्री हनुमान जी है।*
सोचिए भगवान श्री राम की भी सबसे बङी उम्मीद ही हनुमान जी थे। इसलिए उनकी जितनी कथाएं है। उतने ही उत्सव है। ओर जय शब्द तो हनुमान जी का प्रिय शब्द है, इस लिए तुलसीदास ने हनुमान चालीसा में शुरुआत ही जय शब्द से की है। जैसे जय हनुमान ज्ञान गुंनसागर।बदुंओं जब लक्ष्मण जी के शक्ती लगी तो श्री राम पूरी तरह से टूट चुके थे। और राम जी का रोना सुनकर सारे वानर व्याकुल हो गए थे।लेकिन जैसे ही हनुमान जी उस मुर्छित सभा मे संजीवनी बंटी लाये तो लगा। जैसे करुणा रस में वीर रस भर कर उब्बर आया हौ। तो मंगलवार का प्रमुख गुनगान, नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतन सब हनुमत बल वीरा। ओर हां श्री हनुमान जी की एक और प्रमुख विशेषता है कि वे अपने आप को सुरक्षित रख कर दुष्टो का नुकसान करते है, लकां दहन उदाहरण है जिसका।
यूं तो हनुमान जी प्रभु श्री राम के सेवक हैं लेकिन अयोध्या में उनका रुतबा ही अलग है.. बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि हनुमान जी अयोध्या के राजा हैं.. इसके पीछे कहानी है कि सरयू नदी के पवित्र जल में समाधि लेने से पहले प्रभु श्री राम ने अयोध्या जी का राज अपने प्रिय हनुमान जी को सौंप दिया था. हनुमान जी अमर हैं इसलिए आज भी वो अयोध्या के राजा माने जाते हैं. तो अयोध्या में प्रभु हनुमान जी का आशीर्वाद हमें भी मिल गया.. हाथ पकड़ लिया है महावीर विक्रम बजरंगी का.. राम जी की नगरी अयोध्या में ये सौभाग्य प्राप्त हुआ तो मन धन्य हो गया.. हनुमान जी से विनती की है कि वो राम जी से मेरी सिफारिश कर दें..
