कानपुर; दिनांकः 29.11.2025
*उपलब्धिः ‘आजाद’ और ‘विद्यार्थी’ टीबीएम मशीनों के रिट्रीवल में एकल 400 टन क्रॉलर क्रेन का प्रयोग*
*देश में दूसरी बार हुआ ऐसा नवाचार; सीमित स्थान के कारण अपनाया गया अनूठा इंजीनियरिंग समाधान*
*पूरा हुआ टीबीएम मशीनों के रिट्रीवल का कार्य*
कानपुर सेंट्रल में सीमित स्थान की चुनौती को देखते हुए एक अभिनव इंजीनियरिंग समाधान अपनाया गया। यहां स्थित रिट्रीवल शाफ्ट से टनल बोरिंग मशीनों (टीबीएम) को बाहर निकालने के लिए एकल 400 टन क्रॉलर क्रेन का उपयोग किया गया, जिसका उदाहरण भारतीय मेट्रो इतिहास में बहुत कम मिलता है। सामान्यतः ऐसे कार्यों में दो क्रेनों का उपयोग किया जाता है, किंतु स्थान, समय और लागत-तीनों की बचत को ध्यान में रखते हुए इंजीनियरों ने एक ही क्रेन की सहायता से ‘आजाद’ और ‘विद्यार्थी’ दोनों टीबीएम मशीनों के सभी पार्ट्स सफलतापूर्वक बाहर निकाले।
उल्लेखनीय है कि इतनी क्षमता वाली क्रेन का उपयोग अब तक केवल टीबीएम मशीनों की लॉन्चिंग के लिए किया गया है, परंतु इस बार कानपुर मेट्रो ने इसका प्रयोग ‘रिट्रीव’ यानी पार्ट्स को बाहर निकालने के लिए किया। टीबीएम मशीनों के कुछ भाग 65 से 110 टन वजनी होते हैं। इन्हें नियोजित तरीके से प्रशिक्षित विशेषज्ञों की निगरानी में ‘रिट्रीव’ किया जाता है। ज्ञात हो कि ‘आजाद’ और ‘विद्यार्थी’ टीबीएम मशीनों ने क्रमशः सितंबर और अक्टूबर माह में कानपुर सेंट्रल पहुंचकर कॉरिडोर -1 का टनल निर्माण पूरा किया था, जिसके बाद से इनके पार्ट्स को रिट्रीवल शाफ्ट से बाहर निकालने की प्रक्रिया चल रही थी।
आईआईटी से कानपुर सेंट्रल मेट्रो स्टेशन तक यात्री सेवाओं के संचालन को देखते हुए कानपुर सेंट्रल से टीबीएम मशीनों के रिट्रीवल के लिए विशेष योजना के तहत स्टेशन बॉक्स क्षेत्र के बाहर ही शाफ्ट का निर्माण किया गया था, जिससे स्टेशन एवं टनल निर्माण से जुड़े कार्य स्वतंत्र रूप से और बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सकें। पहले ‘आजाद‘ और फिर ‘विद्यार्थी‘ टीबीएम मशीनों के ब्रेकथ्रू के बाद इनके पार्ट्स को 400 टन क्रॉलर क्रेन की मदद से चरणबद्ध तरीके से ‘रिट्रीव’ या निकालने की प्रक्रिया पूरी की गई।
ज्ञात हो कि कॉरिडोर-1 (आईआईटी से नौबस्ता) के अंतर्गत मैकरॉबर्टगंज से स्वदेशी कॉटन मिल रैंप तक लगभग 8.60 किमी लंबे अंडरग्राउंड सेक्शन के टनल निर्माण का कार्य पिछले माह 7 अक्टूबर 2025 को पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता तक अंडरग्राउंड स्टेशनों (झकरकटी और ट्रांसपोर्ट नगर स्टेशन) से होते हुए मेट्रो के जाने का मार्ग पूरी तरह से खुल गया है। वर्तमान में कानपुर सेंट्रल स्टेशन से स्वदेशी कॉटन मिल रैंप के बीच लगभग 3 किलोमीटर लंबे स्ट्रेच पर ट्रैक निर्माण का कार्य तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लि. (यूपीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक श्री सुशील कुमार ने कहा, “कानपुर सेंट्रल में सीमित स्थान के मद्देनज़र हमने एकल 400 टन क्रॉलर क्रेन का प्रयोग कर एक अभिनव समाधान प्रस्तुत किया। ट्रांसपोर्ट नगर और झकरकटी में टनलिंग के दौरान हमारी टीम ने एक साथ टनल सफाई और प्रथम चरण कंक्रीटिंग की प्रक्रिया अपनाकर समय की उल्लेखनीय बचत की। शहर के सबसे व्यस्त क्षेत्रों के नीचे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी हमारी टीम ने उत्कृष्ट कार्य किया है। मुझे विश्वास है कि हमारी टीम आगे भी इसी समर्पण के साथ समयबद्ध रूप से अपने लक्ष्यों को प्राप्त करती रहेगी।”
गौरतलब है कि लगभग 24 किमी लंबे कॉरिडोर-1 (आईआईटी-नौबस्ता) में से वर्तमान में आईआईटी से कानपुर सेंट्रल तक 16 किमी सेक्शन पर यात्री सेवाएं संचालित हैं। कॉरिडोर-1 के बैलेंस सेक्शन (कानपुर सेंट्रल-नौबस्ता) तथा लगभग 8.60 किमी लंबे कॉरिडोर-2 (सीएसए-बर्रा-8) पर सिविल निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है।
