दिनांक, 1 दिसंबर 2025

 

“विश्व एड्स दिवस” के अवसर पर आईएमए कानपुर शाखा द्वारा आज दिनांक, 1 दिसंबर 2025, दिन सोमवार को दोपहर 2:00 बजे सेमिनार हॉल, टेंपल ऑफ सर्विस, आईएमए भवन, 37/7, परेड, कानपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।

 

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को आईएमए कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा , सचिव डॉ. शालिनी मोहन , डॉ. ए. सी. अग्रवाल, चेयरमैन, साइंटिफिक सब कमेटी, डॉ. प्रीति आहूजा, उपाध्यक्ष, डॉ. विशाल सिंह, वित्त सचिव, डॉ. दीपक श्रीवास्तव, साइंटिफिक सचिव, तथा डॉ. कुश पाठक, संयुक्त साइंटिफिक सचिव, आईएमए कानपुर ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।

 

आईएमए कानपुर के अध्यक्ष डॉ अनुराग मेहरोत्रा ने आए हुए सभी पत्रकार बंधुओ का स्वागत करते हुए इस बीमारी की गंभीरता के विषय में बताया कि इस वर्ष World AIDS Day (विश्व एड्स दिवस) -2025 की आधिकारिक थीम है: “Overcoming Disruption, Transforming the AIDS response” (बाधाओं पर काबू पाना, एड्स-प्रतिक्रिया को बदलना). एड्स जागरूकता, समय पर जांच, सुरक्षित व्यवहार, उपचार की निरंतरता तथा समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना ही विश्व एड्स दिवस का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता और जागरूकता अभियान ही एचआईवी/एड्स नियंत्रण की सबसे मजबूत कड़ी हैं।

 

आईएमए कानपुर सचिव डॉ. शालिनी मोहन ने कहा कि विश्व एड्स दिवस का मुख्य उद्देश्य समाज में एड्स से जुड़े भय और भ्रम को दूर कर जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि आज भी कई लोग समय पर जांच नहीं कराते, जिससे रोग नियंत्रण में देरी होती है। एचआईवी/एड्स एक प्रबंधनीय रोग है, बशर्ते उपचार समय पर शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि नियमित दवाओं और परामर्श से संक्रमित व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है।

 

डॉ. ए. सी. अग्रवाल चेयरमैन, साइंटिफिक सब कमेटी ने बताया कि रोकथाम ही एड्स नियंत्रण की सबसे प्रभावी रणनीति है। सुरक्षित व्यवहार, ब्लड स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान इसकी मुख्य कड़ियाँ हैं। यह भी बताया कि एच.आई.वी. के फैलने के मुख्य कारणों में एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाना, संक्रमित सुई या सिरिंज का उपयोग करना, संक्रमित रक्त या रक्त अवयव चढ़ाना तथा एच.आई.वी. संक्रमित गर्भवती मां से शिशु में संक्रमण का प्रसार शामिल है। इसके साथ ही उन्होंने एच.आई.वी. से बचाव के महत्वपूर्ण उपायों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें संयम, वफादारी और कंडोम का नियमित उपयोग, हमेशा नई व स्वच्छ सुई-सिरिंज का प्रयोग, केवल लाइसेंसधारक ब्लड बैंक से जांचे-परखे रक्त का उपयोग, तथा गर्भवती महिलाओं की समय पर एच.आई.वी. जांच करवाने एवं संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने जैसे कदम शामिल हैं।

 

डॉ. प्रीति आहूजा उपाध्यक्ष ने कहा कि महिलाओं और युवाओं में जागरूकता बढ़ाना विशेष रूप से आवश्यक है, क्योंकि जानकारी की कमी कई बार संक्रमण को अनजाने में आगे बढ़ा देती है।

 

डॉ. विशाल सिंह, वित्त सचिव ने कहा कि समुदाय स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम, मेडिकल सेवाओं की उपलब्धता और सहयोगी माहौल एड्स नियंत्रण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि आईएमए कानपुर लगातार इस दिशा में प्रयासरत है।

 

डॉ. दीपक श्रीवास्तव साइंटिफिक सचिव ने कहा कि एचआईवी टेस्टिंग को लेकर हिचकिचाहट दूर करना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि मुफ्त, गोपनीय एवं आसान टेस्टिंग सेवाएँ उपलब्ध हैं, और अधिक से अधिक लोगों को इनका लाभ लेना चाहिए।

 

डॉ. कुश पाठक, संयुक्त साइंटिफिक सचिव ने कहा कि एड्स से जुड़े मिथक और गलत धारणाएँ आज भी बड़ी चुनौती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एड्स सामान्य संपर्क—जैसे हाथ मिलाना, गले मिलना या साथ भोजन करने से—नहीं फैलता।

 

भवदीय,

 

डॉ. शालिनी मोहन

सचिव,

आईएमए कानपुर

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