अब भारत अपनी कहानी खुद लिखेगा — और दुनिया सुनेगी: जिलाधिकारी को सोपा ज्ञापन
भारत की राष्ट्रीय आत्मा, सांस्कृतिक सुरक्षा और सिख विरासत को वैश्विक मंच देने वाली ऐतिहासिक पहल
कानपुर। भारत की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय सुरक्षा, मानवाधिकार तथा वैश्विक सिख डाइसपोरा की दिशा को परिभाषित करने वाली एक निर्णायक पहल आज ऐतिहासिक चरण में पहुँची। गुरु सिंह सभा, कानपुर महानगर एवं केन्द्रीय गुरु सिंह सभा, उत्तर प्रदेश ने सर्वसम्मति से ऐसे पाँच नीति-स्तरीय प्रस्ताव पारित किए हैं, जो उत्तर प्रदेश को ही नहीं, बल्कि पूरे भारत को वैश्विक सिख अध्ययन, सांस्कृतिक कूटनीति और ज्ञान-आधारित राष्ट्रीय सुरक्षा का केंद्र बनाएंगे।यह पहल प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश को नीति-स्तरीय याचिका के माध्यम से प्रस्तुत की गई है, जिसे जिलाधिकारी, कानपुर नगर के माध्यम से अग्रेषित करने का अनुरोध किया गया है।भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, वैश्विक छवि और सांस्कृतिक कूटनीति का भविष्य केन्द्रीय गुरु सिंह सभा, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष, पूर्व विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) तथा गुरु सिंह सभा, कानपुर महानगर के संस्थापक एवं चेयरमैन सरदार कुलदीप सिंह ने स्पष्ट कहा कि छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर में गुरु तेग बहादुर शोध पीठ की स्थापना के पश्चात अब सिख विरासत को वैश्विक पटल पर संस्थागत रूप से स्थापित करने का संकल्प और अधिक सुदृढ़ हुआ है।
उन्होंने कहा कि दूरदर्शी उपकुलपति प्रो. (डॉ.) विनय पाठक के मार्गदर्शन सहयोग और सकारात्मक दृष्टिकोण से इस प्रयास को नई दिशा और नई ऊर्जा प्राप्त हुई है। पिछले 28 वर्षों से सिख इतिहास गुरमत दर्शन और सभ्यतागत योगदान को अकादमिक शोध के माध्यम से विश्व के समक्ष प्रस्तुत करने का जो स्वप्न देखा गया था, वह अब निर्णायक गति के साथ साकार होने की ओर अग्रसर है।
“वोट-बैंक राजनीति ने सिखों को कभी समुचित आवाज़ नहीं दी। अब इतिहास बदलेगा।”
यह आयोग शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा, संस्कृति और विरासत में सिख समुदाय की औपचारिक व संवैधानिक भागीदारी सुनिश्चित करेगा।
गुरु तेग बहादुर साहिब जी के प्रकाश दिवस को National Integration Day एवं शहादत दिवस को National Human Rights Day घोषित किया जाए! गुरु सिंह सभा, कानपुर महानगर
चेयरमैन सरदार कुलदीप सिंह,सह-संयोजक: सिमरनजीत सिंह एवं गुरविंदर सिंह वासू, इत्यादि लोग रहे!
