कानपुर
रेणुका वाटिका नागरिक समिति के पदाधिकारियों ने प्रेस कांफ्रेंस कर खोला मोर्चा
पूर्व पुलिस आयुक्त अखिल कुमार पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
पदस्त शक्तियों का दुप्रयोग कर रेणुका पार्क कब्ज़ा कराने की साज़िश का लगाया गंभीर आरोप
विधान परिषदकी सद्भाव समिति का केडीए वीसी को निर्देश, पार्क के नोटिफिकेशन को करें सुरक्षित
केडीए ने जवाहर विद्यालय समिति को चार भूखंडों में एक लेने का दिया विकल्प,जारी हुआ नोटिस
भूखंड का विकल्प नहीं स्वीकार ने पर जमा की गई धनराशि ब्याज के साथ कर दी जाएगी वापस
कानपुर: पिछले एक वर्ष से सुर्खियों में रहे साकेत नगर के रेणुका पार्क पर कब्जा प्राप्त करने की क़वायद पर फ़िलहाल विराम लग गया है उत्तर प्रदेश विधान परिषद की सद्भाव समिति के सभापति द्वारा जारी आदेश का हवाला देते हुये बताया कि नोटिफाइड पार्क किसी भी सूरत में आवंटित नहीं किया जा सकता। उन्होंने केडीए उपाध्यक्ष को निर्देशित किया है कि बोर्ड में प्रस्ताव लाकर पार्क के नोटिफिकेशन को सुरक्षित किया जाए। रेणुका वाटिका नागरिक विकास समिति की शिकायत पर सुनवाई करते हुए सदभाव समिति ने इस बात को गंभीरता से संज्ञान में लिया कि केडीए ने किसी भी फोरम या न्यायालय में यह बात नहीं रखी कि उक्त पार्क के सम्बन्ध में नोटिस दिया गया था। समिति के हस्तक्षेप के बाद केडीए उपाध्यक्ष ने जवाहर विद्यालय समिति को चार भूखंड का विकल्प दिया है, उसको स्वीकार न करने पर ब्याज सहित धनराशि लौटाने का नोटिस जारी किया है।रेणुका वाटिका नागरिक विकास समिति का पक्ष रख रहे अधिवक्ता अखिलेश दुबे के प्रयास और स्थानीय लोगों के विरोध के कारण तीन बार पांच थानों का पुलिस बल, पीएसी लाकर भी केडीए के अधिकारी पार्क पर जवाहर विद्यालय समिति को कब्जा नहीं दे सके। पुलिस कमिश्नर ने कई बार अखिलेश दुबे से पार्क का प्रकरण निपटाने के लिए बैठक की, किन्तु जनहित में अखिलेश दुबे द्वारा मना कर दिए जाने पर उनको रातों रात माफिया बनाकर जेल भेज दिया गया। पार्क की पैरवी करने वालों में भय बनाने के लिए अखिलेश दुबे के बाद भाजपा के श्रमप्रकोष्ठ प्रदेश संयोजक भूपेश अवस्थी और उनके पुत्र को भी 15 वर्ष पूर्व घटित मनगढंत घटना में अभियुक्त बना दिया गया।रेणुका वाटिका नागरिक विकास समिति के पदाधिकारियों ने पूर्व पुलिस आयुक्त अखिल कुमार पर आरोप लगाया कि अखिलेश दुबे की गिरफ्तारी के दो दिन बाद आठ अगस्त को वह एक बिल्डर के यहां सेवारत अपनी पत्नी के साथ यमुना अथारिटी के सीईओ से मुलाकात करने एक मसाला व्यवसायी की दो करोड़ की गाड़ी से नोएडा गये थे। साथ ही आरोप लगाया कि एनआरआई सिटी की तमाम जमीनों से अखिल कुमार सीधे जुड़े है इसलिये दबाव बनाने के लिए अधिवक्ताओं को जबरन जेल भेजा गया। पदाधिकारियों का दावा है कि अधिवक्ता अखिलेश दुबे पर पार्क प्रकरण से पहले कोई मुकदमा नहीं था। पूर्व पुलिस आयुक्त ने पार्क पर कब्जा कराने की मंशा से उनके खिलाफ 10 से 15 वर्ष पुराने प्रार्थना पत्रों पर कार्यवाही करते हुए जेल भेज दिया। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में वाद दाखिल करने वाले अजय पांडेय, मनोज पांडेय को भी धमकाया गया। प्रेस कांफ्रेंस करने वाले समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि आशीष शुक्ला की एक आडियो भी प्रचलित है जिसमें वह कह रहे है कि “अखिलेश दुबे के विरुद्ध प्रार्थना पत्र दीजिये। पुलिस कमिश्नर मैनेज हैं। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष का एक ऑर्डियो भी वायरल है, जिसमें वह पुलिस आयुक्त से काम कराने के रेट बता रहे हैं।
