ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से बीएसएफ जवान शहीद

तिरंगे के साथ भारी संख्या में युवाओं ने दी अंतिम विदाई

बिल्हौर।अमृतसर में ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से शहीद हुए बीएसएफ के हवलदार विनोद कुमार पाल (52) का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह अरौल क्षेत्र के बहरामपुर गांव पहुंचा। जैसे ही तिरंगे में लिपटा शव उनके घर पहुंचा, परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी मीरा पाल, बेटा मयंक उर्फ शंटी और बेटी गीतांशी शव से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़े। यह दृश्य देख वहां मौजूद हर आंख नम हो गई।
कानपुर के अरौल क्षेत्र स्थित बहरामपुर गांव निवासी विनोद कुमार पाल का शव अमृतसर से पोस्टमॉर्टम के बाद पहले कल्याणपुर लाया गया, जहां उनका परिवार निवास करता है। इसके बाद सेना के वाहन से पार्थिव शरीर गांव बहरामपुर पहुंचाया गया। गांव में जैसे ही शव पहुंचा, पूरा इलाका देशभक्ति के नारों से गूंज उठा।शहीद जवान की अंतिम यात्रा में आसपास के कई गांवों से लोग उमड़ पड़े। इस दौरान सैकड़ों युवा हाथों में तिरंगा लेकर “भारत माता की जय” और “वीर जवान अमर रहें” के नारे लगाते हुए शामिल हुए। गंगा किनारे स्थित घाट पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बीएसएफ जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और बेटे मयंक ने मुखाग्नि दी।परिजनों के अनुसार, रविवार देर रात करीब एक बजे ड्यूटी के दौरान विनोद कुमार पाल की अचानक तबीयत बिगड़ गई। साथी जवान उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। तीन दिन बाद बुधवार को उनका पार्थिव शरीर गांव लाया गया।बेटे मयंक ने बताया कि रविवार रात करीब 8 बजे माता-पिता से वीडियो कॉल पर बात हुई थी। पापा बिल्कुल ठीक थे और जल्द छुट्टी लेकर घर आने की बात कह रहे थे। करीब छह महीने पहले उन्हें फैटी लीवर की समस्या हुई थी, लेकिन इलाज के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो गए थे।बेटी गीतांशी ने बताया कि रविवार को पापा ने पढ़ाई के बारे में पूछा था। इससे पहले वह दीपावली पर घर आए थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि वही आखिरी बातचीत होगी।परिजनों ने सरकार से दोनों बच्चों को योग्यता के अनुसार नौकरी, गांव में शहीद स्मारक बनाए जाने और शहीद के नाम पर सड़क का नामकरण करने की मांग की है।परिवार में पत्नी मीरा पाल, बेटा मयंक, बेटी गीतांशी, मां पार्वती देवी और छोटा भाई प्रमोद पाल हैं। विनोद पाल के बड़े भाई मनोज पाल भी बीएसएफ में सीओ पद पर मणिपुर में तैनात हैं। सूचना मिलते ही पूरे परिवार में मातम छा गया।शोकाकुल माहौल में क्षेत्रवासियों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधाया। गांव ने अपने वीर सपूत को नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

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