*कानपुर में फर्जी जमानतगीरों का सिंडीकेट पुलिस के रडार पर, 578 जमानतगीरों का हुआ सत्यापन*

 

कानपुर नगर

 

साइबर अपराध, लूट और हत्या जैसे गंभीर मामलों में आरोपियों को फर्जी जमानत पर जेल से बाहर निकलवाने वाले जमानतगीरों का सिंडीकेट जल्द ही टूट सकता है। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के निर्देश पर 1 दिसंबर से एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत खासतौर पर दूसरे जिलों व राज्यों से पकड़े गए आरोपियों की जमानत कराने वालों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है।

इस अभियान के नोडल अधिकारी एडीसीपी एलआईयू महेश कुमार को बनाया गया है। बीते 29 दिनों में 378 मामलों में जमानत लेने वाले 578 जमानतगीरों का सत्यापन किया जा चुका है। जांच के दौरान कई जमानतगीरों के दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अभियान पूरा होने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस का मानना है कि गंभीर अपराधों में आरोपियों को जल्दी जमानत मिलने से अपराध बढ़ने की आशंका रहती है। जेल से बाहर आते ही अपराधियों से आम लोगों में भय का माहौल बनता है, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए चुनौती बन जाता है।

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पुलिस अदालत में आरोपियों की जमानत न हो इसके लिए पूरी पैरवी करती है, लेकिन शहर में जमानतगीरों का एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो जालसाजी कर अपराधियों की जमानत कराने में जुटा रहता है। रुपयों के लालच में कई लोग एक साथ कई-कई अपराधियों की जमानत ले रहे हैं। कुछ मामलों में फर्जी नाम-पते और दस्तावेजों के आधार पर भी जमानत कराई जा रही है।

इस पूरे मामले में चौकी और थाना स्तर पर सत्यापन में लापरवाही भी सामने आई है, जिसका फायदा अपराधियों को मिल रहा था। इसी को लेकर पुलिस आयुक्त ने यह अभियान शुरू कराया है। संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय विनोद कुमार सिंह ने बताया कि जो लोग फर्जी तरीके से या बार-बार अलग-अलग अपराधियों की जमानत ले रहे हैं, उनकी पहचान की जा रही है। अभियान फिलहाल जारी है।

दूसरे राज्यों से पकड़े गए साइबर ठग बने बड़ी चुनौती

पुलिस के लिए दूसरे राज्यों और जिलों से पकड़कर लाए गए साइबर ठग सबसे बड़ी मुसीबत बने हुए हैं। साइबर क्राइम टीम को ऐसे आरोपियों को पकड़ने में महीनों लग जाते हैं, लेकिन जेल भेजने के कुछ ही दिनों में उन्हें जमानत मिल जाती है।

अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बाहरी जिलों और राज्यों से पकड़े गए आरोपियों की जमानत कौन ले रहा है, उसका उनसे क्या रिश्ता है और किस आधार पर जमानत कराई जा रही है। जांच के बाद फर्जी जमानतगीरों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

 

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