*आपदा में उजड़े परिवारों को सरकार का सहारा, 107 मामलों में 4.28 करोड़ की सहायता*

 

*आकाशीय बिजली से सर्पदंश तक, आपदा राहत से 48 घंटे में पहुंचा मुआवजा*

 

*आपदा के बाद राहत की रफ्तार तेज, तीन वर्षों में बढ़ी सहायता की पहुंच*

 

*107 जनहानि मामलों में मुआवजा सीधे खातों में, विशेष मैकेनिज्म से मिली राहत*

 

कानपुर नगर।

 

 

बिल्हौर तहसील के ग्राम पलिया बुजुर्ग में आकाशीय बिजली गिरने से 34 वर्षीय सरोज कुमार की मौत के बाद परिवार के सामने जीविका का गहरा संकट खड़ा हो गया था। घर का कमाने वाला सदस्य अचानक चला गया और पत्नी पूजा के सामने रोज़मर्रा की जरूरतों से लेकर भविष्य तक की चिंता एक साथ आ खड़ी हुई। ऐसे कठिन समय में प्रदेश सरकार की दैवीय आपदा राहत योजना पीड़ित परिवार के लिए सहारा बनकर सामने आई। शासन की ओर से अनुमन्य चार लाख रुपये की सहायता राशि महज 48 घंटे के भीतर सीधे खाते में पहुंच गई, जिससे परिवार को तत्काल आर्थिक संबल मिल सका।

 

सरोज कुमार का मामला अकेला नहीं है। घाटमपुर क्षेत्र में तालाब में डूबकर हुई मृत्यु के बाद एक परिवार को राहत दी गई, वहीं थाना पनकी क्षेत्र में अग्निकांड में जान गंवाने वाले गृहस्थ के परिजनों को भी आपदा राहत राशि उपलब्ध कराई गई। इसी तरह सर्पदंश से हुई मृत्यु के एक मामले में भी शासन से अनुमन्य सहायता पीड़ित परिवार तक पहुंचाई गई। सभी मामलों में राहत राशि को समयबद्ध ढंग से सीधे खातों में हस्तांतरित की गई।

 

वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक जनपद में 107 दुर्भाग्यपूर्ण हादसों में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के खातों में कुल 4 करोड़ 28 लाख रुपये की धनराशि हस्तांतरित की जा चुकी है। इनमें डूबने से हुई 63, आंधी-तूफान से 6, वनरोज के आघात से 1, आकाशीय बिजली से 6, सर्पदंश से 9, अतिवृष्टि से 8 तथा अग्निकांड से 14 मौतें शामिल हैं।

 

वित्तीय वर्ष 2024-25 में जनपद में 71 जनहानि के मामलों में कुल 2 करोड़ 84 लाख रुपये की सहायता दी गई थी। इनमें डूबने से हुई 45, वनरोज से 3, आकाशीय विद्युत से 7, अतिवृष्टि से 4 तथा अग्निकांड से 7 मौतें शामिल थीं। इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2023-24 में 41 जनहानि के सापेक्ष कुल 1 करोड़ 64 लाख रुपये की सहायता पीड़ित परिजनों को उपलब्ध कराई गई, जिनमें डूबने से हुई 28, आकाशीय विद्युत से 4, अतिवृष्टि से 4 तथा सर्पदंश से हुई 5 मौतें शामिल थीं।

 

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री की स्पष्ट प्राथमिकता है कि आपदा की स्थिति में पीड़ित परिवारों को त्वरित, पारदर्शी और सम्मानजनक सहायता मिले। इसी निर्देश के तहत जनपद स्तर पर एक विशेष मैकेनिज्म विकसित किया गया है, जिससे सभी प्रकरणों की त्वरित जांच कर राहत राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी जा रही है। उन्होंने कहा कि उद्देश्य यह है कि संकट की घड़ी में पीड़ित परिवार को अनावश्यक कार्यालयी प्रक्रियाओं से न गुजरना पड़े।

 

*क्या है दैवीय आपदा राहत योजना*

 

प्रदेश सरकार की दैवीय आपदा राहत योजना के तहत प्राकृतिक या आकस्मिक आपदाओं में जान गंवाने वाले व्यक्ति के आश्रित को आर्थिक सहायता दी जाती है। डूबने, आकाशीय बिजली, सर्पदंश, अग्निकांड, आंधी-तूफान, अतिवृष्टि और वन्य जीव के आघात जैसी घटनाएं इस योजना में शामिल हैं। जनहानि की स्थिति में मृतक के आश्रित को सामान्यतः 4 लाख रुपये की सहायता दी जाती है। घटना की सूचना के बाद राजस्व विभाग द्वारा जांच कर प्रकरण राहत पोर्टल पर दर्ज किया जाता है और स्वीकृति के उपरांत राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे खाते में भेजी जाती है।

 

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*आपदा राहत : संक्षेप में*

सहायता राशि (जनहानि): ₹4 लाख

 

भुगतान समय: 48 से 72 घंटे के भीतर

 

*वर्ष 2025-26 (अब तक):*

 

107 जनहानि | ₹4.28 करोड़

 

*मृत्यु के कारण (2025-26):*

 

डूबना 63 | आंधी-तूफान 6 | वनरोज आघात 1 | आकाशीय बिजली 6 | सर्पदंश 9 | अतिवृष्टि 8 | अग्निकांड 14

 

*पिछले वर्ष:*

 

2024-25: 71 जनहानि | ₹2.84 करोड़

 

2023-24: 41 जनहानि | ₹1.64 करोड़

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