छोटे किसानों के मसीहा बने भंवरपाल, आलू की खेती से बदली किस्मत

 

– महुआ के भंवरपाल सिंह बने प्रगतिशील किसान, 100 एकड़ में करते हैं आलू का बीज उत्पादन

 

– आलू बीज उत्पादन में सफलता, कई पुरस्कारों से सम्मानित; पद्मश्री के लिए नाम प्रस्तावित

 

कानपुर, 13 जनवरी।

कानपुर जिले के सरसौल ब्लॉक के महुआ गांव के रहने वाले भंवरपाल सिंह जाने-माने प्रगतिशील किसान हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि अगर खेती को सही तरीके, नई तकनीक और धैर्य के साथ किया जाए तो किसान अच्छी आमदनी कर सकता है। योगी सरकार की कृषि नीति से खेती को वैज्ञानिक तरीके से जोड़ने, कृषि संस्थानों से संपर्क बढ़ाने और किसानों को नई जानकारी देने का असर ज़मीन पर साफ दिख रहा है।

 

भंवरपाल सिंह को गेहूं की खेती, धान की खेती और मिर्च की खेती में बेहतर उत्पादन और उन्नत कृषि कार्य के लिए कई बार जिला स्तर पर पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र दिए जा चुके हैं। इन्हीं सम्मानों के बाद उन्हें जिले के प्रगतिशील किसानों में गिना जाने लगा।

 

*कानून की पढ़ाई के बाद खेती को चुना*

भंवरपाल सिंह ने 1987 में इलाहाबाद से कानून की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक सिविल सर्विसेज की तैयारी की, लेकिन 1992 में गांव लौटकर खेती शुरू कर दी। तभी से वे लगातार खेती कर रहे हैं।शुरुआत में उन्होंने गेहूं, धान और मिर्च की खेती की। अच्छी पैदावार के लिए उन्हें कई बार जिला स्तर पर पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं।

 

 

*साल 2000 से आलू की खेती शुरू की*

साल 2000 में आलू की खेती शुरू करने के बाद भंवरपाल सिंह की पहचान और आमदनी दोनों बढ़ीं। आज वे 100 एकड़ जमीन में आलू उगा रहे हैं। 80 प्रतिशत क्षेत्र में बीज आलू और 20 प्रतिशत क्षेत्र में खाने वाला आलू पैदा कर रहे हैं। पैदावार करीब 10 हजार कुंतल है। आलू उत्तर प्रदेश और बंगाल तक भेजा जाता है। आलू की खेती से करीब डेढ़ करोड़ रुपये का मुनाफा कमाते हैं।

 

*बीज आलू के लिए अपनाते हैं नई तकनीक*

भंवरपाल सिंह बताते हैं कि बीज वाला आलू पूरी तरह रोग रहित होना चाहिए। इसके लिए सही बीज, समय पर दवा और आधुनिक तकनीक जरूरी होती है। मेरठ और शिमला के आलू अनुसंधान केंद्रों से बीज लेकर वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन करते हैं। बीज आलू में खर्च ज्यादा होता है, लेकिन दाम भी अच्छा मिलता है।

 

*दूसरे किसानों को देते हैं सलाह*

आज भंवरपाल सिंह से उत्तर प्रदेश, बंगाल, पंजाब और गुजरात के किसान जुड़े हुए हैं। प्रयागराज, सीतापुर, हरदोई, आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, कन्नौज और फर्रुखाबाद के किसान उनसे आलू की खेती को लेकर सलाह लेते हैं।

 

भंवरपाल सिंह कहते हैं—

 

“कोई भी खेती करने से पहले कम से कम पांच से दस साल की योजना बनानी चाहिए। आज मोबाइल ऐप, यूट्यूब और नई तकनीक से घर बैठे जानकारी मिल जाती है। युवाओं को खेती से जुड़ना चाहिए।”

 

*पद्मश्री के लिए नाम प्रस्तावित*

भंवरपाल सिंह के कृषि क्षेत्र में योगदान को देखते हुए अक्टूबर 2025 में पद्मश्री सम्मान के लिए उनका नाम प्रस्तावित किया गया है। यह प्रस्ताव डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर और जॉइंट डायरेक्टर, आलू अनुसंधान केंद्र मेरठ की ओर से भेजा गया है।

 

मुख्य उपलब्धियां

– गेहूं, धान और मिर्च की खेती में जिला स्तरीय पुरस्कार

– 100 एकड़ में आलू की खेती

– 10 हजार कुंतल सालाना उत्पादन

– डेढ़ करोड़ से अधिक की कमाई

– कई राज्यों के किसानों के लिए मार्गदर्शक

– पद्मश्री के लिए नाम प्रस्तावित

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