इनकम टैक्स बार एसोसिएशन का दल वियतनाम से लौटा, अंतरराष्ट्रीय रिफ्रेशर कोर्स में लिया हिस्सा

कानपुर। कानपुर इनकम टैक्स बार एसोसिएशन का 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बुधवार को वंदे भारत एक्सप्रेस से शहर वापस लौट आया। यह दल 6 से 13 जनवरी तक वियतनाम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय आवासीय पुनश्चर्या कार्यक्रम (आईआरआरसी 2025–26) में सक्रिय भागीदारी के बाद स्वदेश पहुंचा है।

कार्यक्रम में आयकर, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), बेनामी संपत्ति कानून और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन तकनीकी सत्र हुए। इनका उद्देश्य कर अधिवक्ताओं और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में अद्यतन करना था।

वरिष्ठ कर अधिवक्ता संतोष कुमार गुप्ता ने जीएसटी पर कहा कि कानून में व्यावहारिक चुनौतियां बनी हुई हैं, जिनका समाधान सही व्याख्या, संतुलित प्रशासन और तकनीकी सुधारों से संभव है। उन्होंने जोर दिया कि कर व्यवस्था व्यापार को सुगम बनाए, बाधित नहीं करे।

चार्टर्ड अकाउंटेंट राजीव गुप्ता ने बेनामी संपत्ति कानून पर व्याख्यान में बताया कि पेशेवरों की भूमिका निर्णायक है। तथ्यों की जांच, दस्तावेजी साक्ष्य और कानूनी समझ के अभाव में अनावश्यक विवाद उत्पन्न होते हैं, जिन्हें विशेषज्ञ मार्गदर्शन से रोका जा सकता है।

प्रशांत वर्मा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की चर्चा करते हुए कहा कि भविष्य में कर सलाहकारों को तकनीक के साथ तालमेल बिठाना होगा। एआई अनुपालन को आसान बनाने के साथ प्रोफेशनल दक्षता और विश्लेषण को नई ऊंचाई देगा।

सूर्यांश अग्रवाल ने आयकर सत्र में केस-लॉ आधारित दृष्टिकोण और समयबद्ध अनुपालन पर बल दिया, जिससे विवादों में कमी आ सकती है।

एसोसिएशन अध्यक्ष प्रदीप कुमार द्विवेदी ने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय कोर्स पेशेवर ज्ञान के साथ वैश्विक सोच, संवाद और अनुशासन विकसित करते हैं। भविष्य में भी ऐसे आयोजन जारी रहेंगे।

प्रतिनिधिमंडल ने वियतनाम की कर प्रणाली, उद्योग और सांस्कृतिक विरासत का अध्ययन किया। उपाध्यक्ष मनीष श्रीवास्तव, महामंत्री शरद सिंघल सहित गोविंद प्रसाद गुप्ता, शैलेन्द्र सचान, नरपत जैन, सरबजीत सिंह, जगदीश जायसवाल आदि ने आयोजन को सफल बनाया। यह जानकारी कानपुर इनकम टैक्स बार एसोसिएशन के महामंत्री शरद सिंहल ने दी।

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