कानपुरः जमीयत उलेमा शहर कानपुर के तत्वावधान (under the aegis) मैं 16, 17 और 18 जनवरी 2026
को रजबी ग्राउंड, परेड में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय ऐतिहासिक और मध्य इजलास मेराज-उन-न के विवरण और उद्देश्यों से अवगत कराने के लिए आज जमीयत बिल्डिंग, रजयी रोड स्थित कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस अवसर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जमीयत उलेमा उत्तर प्रदेश के महासचिव मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्ला कासमी ने शहर की जागरुक जनता बुद्धिजीवियों और कौम का दर्द रखने वाले सभी वर्गों से इस सम्मेलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की।
मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्ला कासमी ने पत्रकारों को विवरण देते हुए बताया कि यह तीन दिवसीय सम्मेलन न केवल एक पारंपरिक कार्यक्रम है, बल्कि यह वर्तमान परिस्थितिर्वा में समाज सुधार इस्ला ए-मुआशरा) का एक प्रभावी आंदोलन है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया जिसु बेचैनी और विखराव जा शिकार है, उसका समाधान केवल और केवल नयी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) द्वारा लाई गई शिक्षाओं और उनके प्रेम व मानवता के संदेश में छिपा है।
इस वर्ष सम्मेलन के तीन दिवसीय कार्यक्रम में ‘तरबियत-ए- जौजैन (पति-पत्री का प्रशिक्षण के शीर्षक से आयोजित होने वाला विशेष सुधारात्मक और प्रशिक्षण कार्यक्रम इस साल की सबसे प्रमुख और ध्यान आकर्षित करने वाली कोशिश है। इसका उद्देश्य समाज में तेजी से बढ़ रहे पति-पानी के झगडी सास-बहू की अनबन, ननद-भाभी के मतभेद, घरेलू हिंसा, तलाक और पारिवारिक टूटन जैसे गंभीर मुद्दाँ का व्यावहारिक और सकारात्मक समाधान पेश करना है। इस कार्यक्रम में कुरान और सुन्नत की रोशनी में वैवाहिक जीवन के बुनियादी सिद्धांतों, पति-पत्नी के अधिकारों और कर्तव्यों, सहनशीलता, अच्छे व्यवहार, बातचीत के सही शिष्टाचार और मतभेदों को सुलझाने के व्यावहारिक तरीके स्पष्ट किए जाएंगे। यह परिक्षण भाषण विशेष रूप से युवा लड़कों और लड़कियों, शादी के इच्छुक व्यक्तियाँ और नवविवाहित जोडी के लिए तैयार किया गया है, ताकि वे शादी को कैवल एक रस्म नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी और सम्मानजनक रिश्ता समझ सकें। यह कार्यक्रम किसी विशेष वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सुधारात्मक संदेश है, जिसका उद्देश्य टूटते परिवारों को बचाना, घरी में शांति बहाल करना और सी-नबवी की रोशनी में एक मजबूत पारिवारिक प्रणाली बनाना है।
