हमहादान के महापर्व पर अनोखा दान,गोंडा मेडिकल कॉलेज को मिला पहला शरीर

 

सेंगर दंपति ने पूरा किया अपना वादा

 

कानपुर से लाकर समर्पित की सरोज मिश्रा की देह

 

कानपुर बाइस साल पहले कानपुर से युग दधीचि देहदान अभियान प्रारंभ कर पूरे प्रदेश में इसका विस्तार करने वाले मनोज सेंगर एवम माधवी सेंगर ने आज गोंडा मेडिकल कॉलेज को मकर संक्रांति के महादान के महापर्व पर अध्ययन हेतु पहली देह कानपुर समर्पित करते हुए अपने उस वादे को पूरा किया जो उन्होंने अपनी 11 नवंबर को की गई पत्रकार वार्ता में प्राचार्य से किया था।आज कानपुर से देह लेकर गये सेंगर दंपति ने बताया कि 87/8, विजय नगर कानपुर निवासी 86 वर्षीय श्रीमती सरोज मिश्रा ने तेरह साल पहले वर्ष 2012 में देहदान संकल्प किया था, 14 जनवरी 2026 को दोपहर 2 बजे उनका निधन होने पर उनके भतीजे मनीष तिवारी ने मनोज सेंगर को फोन पर सूचना देकर देहदान संकल्प पूरा कराने का आग्रह किया, इस पर अभियान की महासचिव माधवी सेंगर ने देह को गोंडा मेडिकल कॉलेज को दान करने का निश्चय किया। अभियान प्रमुख मनोज सेंगर ने रात में ही देहदान के आवश्यक कागज पत्रक तैयार किए और आज 15 जनवरी को सुबह करीब नौ बजे कानपुर से चल कर दोपहर लगभग डेढ़ बजे सेंगर दंपति गोंडा मेडिकल कॉलेज पहुंचे।जहां एनाटॉमी विभाग से डा राजेश कुमार, विपिन कुमार ने प्राचार्य डॉ डी कोटस्थाने के निर्देशन में पार्थिव देह को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए सम्मान सहित स्वीकार किया।

 

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की बेटी है सरोज

 

मनोज सेंगर ने बताया कि स्व सरोज मिश्रा के पिता स्व हरिविलास प्रसाद तिवारी सहित पूरा परिवार ही स्वाधीनता संग्राम सेनानी रहा है, आज उनकी बेटी ने भी उनके चरण चिन्हों पर चलते हुए अपनी देह समाज हित समर्पित कर सेवा की मिसाल कायम की है।

 

सूर्य उत्तरायण होते ही त्यागा शरीर

 

सरोज मिश्रा के पति राज किशोर मिश्र ने बताया कि ने दोपहर बाद सूर्य उत्तरायण होते ही उनकी पत्नी ने प्राण त्याग दिए। जीवन भर एक धर्मपरायण महिला के रूप में रहते हुए उनका कहना था कि हमारे ऊपर समाज का ऋण है जिसे हम देहदान करके ही चुका सकते हैं,

कानपुर से चलते समय पति राजकिशोर मिश्र, भाई ज्ञानेंद्र तिवारी, भतीजे आनंद तिवारी, मनीष तिवारी, डा बृज मिश्र सहित परिजनों द्वारा पार्थिव देह की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आरती व पुष्पांजलि अर्पित करते हुए गोंडा के लिए रवाना किया गया।गोंडा मेडिकल कॉलेज को पहला और अभियान के अंतर्गत यह 314वीं देह दान कराई गई है।

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