*कानपुर की दिव्या भंडोह 46 वर्ष की उम्र में रचेंगी इतिहास: सांसद रमेश अवस्थी ने खादी का तिरंगा किया भेंट ।*
कानपुर की बेटी दिव्या भंडोह अब विश्व स्तर पर इतिहास रचने की कगार पर हैं। 46 वर्ष की उम्र में वे सेवन समिट्स (सात महाद्वीपों की सबसे ऊँची चोटियां) का लक्ष्य पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। पांडु नगर की निवासी और अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही दिव्या को कानपुर महानगर के सांसद श्री रमेश अवस्थी ने खादी का तिरंगा भेंट कर गहन सम्मान प्रदान किया। यह सम्मान उनके अदम्य साहस, कठिन संघर्ष, अब तक की उपलब्धियों और आगामी चुनौतियों को जीतने की दृढ़ इच्छाशक्ति के लिए दिया गया।
सांसद श्री अवस्थी ने दिव्या की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि 46 वर्ष की उम्र में भी दिव्या महिला सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल बन चुकी हैं। उन्होंने न केवल कानपुर शहर का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे देश की महिलाओं के लिए हौसला बढ़ाने का काम किया है। यह कानपुर के लिए गर्व की बात है और महिलाओं के स्वाभिमान से जुड़ा मुद्दा है। सांसद ने दिव्या से विशेष आग्रह किया कि वे इस खादी के तिरंगे को अपने अगले लक्ष्य की प्राप्ति पर फहराएं, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के खादी और स्वदेशी को बढ़ावा देने के अभियान को और मजबूती मिले। उन्होंने आगे कहा, आप जब अगला मिशन फतेह कर के आएंगी तो मेरी कानपुर लोकसभा आपका और ज़ोरदार स्वागत उत्सव की तरह मनाएगी।
ये शब्द सुनकर दिव्या की आँखें भावुक हो गईं। उन्होंने सांसद का हृदय से आभार जताया और वादा किया कि यह तिरंगा वे हर अभियान में विजय के प्रतीक के रूप में लहराएंगी। दिव्या ने कहा कि सांसद जी द्वारा भेंट किए गए इस खादी के तिरंगे को वे कानपुर के हर नागरिक के आशीर्वाद और देश के मान के रूप में देखती हैं। उन्होंने देश की महिलाओं से अपील की – खुद को किसी सीमा में न बांधें, सपनों को पूरा करने का साहस दिखाएं, क्योंकि चुनौतियां ही हमें नई ऊँचाइयों तक पहुंचाती हैं।
सांसद रमेश अवस्थी की यह पहल अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने न केवल दिव्या के हौसले को नई ऊर्जा दी, बल्कि खादी के माध्यम से स्वदेशी भावना को भी मजबूत किया। ऐसे नेतृत्व से कानपुर गौरवान्वित है।
*सफल बिजनेसवुमन से विश्व स्तरीय पर्वतारोही तक का प्रेरणादायक सफर*
दिव्या भंडोह कानपुर की जानी-मानी इंटीरियर डिजाइनर हैं। उनकी उम्र वर्तमान में 46 वर्ष है और उन्होंने यह लक्ष्य 40 वर्ष की उम्र से शुरू किया था। उनका जीवन तब पूरी तरह बदल गया जब कोविड-19 महामारी ने उनके व्यवसाय को पूरी तरह ठप कर दिया। लंबे समय तक काम बंद रहने, घर तक सीमित जीवन और आर्थिक-मानसिक दबाव ने उन्हें गहरे अवसाद और तनाव में डाल दिया। निराशा के इस दौर में दिव्या ने खुद को मजबूत बनाने का फैसला किया और 2019 से पर्वतारोहण का जज्बा अपनाया। यह चुनौतीपूर्ण सफर उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।
उनकी यात्रा की शुरुआत 2021 में दयारा बुग्याल ट्रेक (3,048 मीटर ≈ 10,000 फीट) से हुई, जो उनकी पहली बड़ी उपलब्धि थी। इस सफलता ने उन्हें और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
उनकी प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं:
5 अप्रैल 2022: एवरेस्ट बेस कैंप (5,364 मीटर ≈ 17,598 फीट) तक की कठिन यात्रा पूरी की – यह उनके जीवन के सबसे यादगार पलों में से एक रहा।
3 सितंबर 2023: अफ्रीका की सबसे ऊँची चोटी माउंट किलिमंजारो (5,895 मीटर) को फतह किया।
4 जुलाई 2024: यूरोप की सर्वोच्च शिखर माउंट एल्ब्रुस (5,642 मीटर) पर सफल चढ़ाई।
2025: नेपाल की तकनीकी रूप से सबसे चुनौतीपूर्ण चोटियों में से एक आइलैंड पीक (इम्जा त्से) (6,160 मीटर) पर विजय प्राप्त की, जिसने उनकी क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साबित किया।
दिव्या अब सेवन समिट्स का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही हैं। उनका अगला बड़ा पड़ाव दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊँची चोटी माउंट अकोंकागुआ (6,962 मीटर) है – जो पश्चिमी और दक्षिणी गोलार्ध की सर्वोच्च शिखर है। इस चढ़ाई में लगभग 70 किलोमीटर का अत्यंत कठिन ट्रेक शामिल है। दिव्या ने सभी आवश्यक प्रोटोकॉल पूरे कर लिए हैं और अब कानपुर से इस मिशन के लिए रवाना होने वाली हैं। दिव्या का यह सफर साबित करता है कि मानसिक तनाव और विपरीत परिस्थितियों से निकलकर भी विश्व की ऊँचाइयों को छुआ जा सकता है
