*विलादत इमाम हुसैन पर गरीब बच्चोँ को शिक्षा दिलाने का संकल्प लिया।*

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कानपुर 23 जनवरी पैगम्बर ए इस्लाम के नवासे, मौला अली के शहज़ादे, शहीद ए आज़म हज़रत इमाम हुसैन रजि अन० की यौम ए विलादत (जन्मदिवस) पर जशन ए इमाम हुसैन, इंसानियत कायम रहने के पैगाम के साथ खानकाहे हुसैनी हज़रत ख्वाजा सैय्यद दाता हसन सालार शाह की दरगाह कर्नलगंज ऊँची सड़क मे अदबों एहतिराम, अकीदत मोहब्बत के साथ धूम-धाम के साथ परम्परागत ढंग के साथ मनाया व गरीब बच्चों को शिक्षा दिलाने का संकल्प लिया।

 

सुबह 11 बजे कुरानख्वानी का एहतिमाम किया गया जुमा की नमाज़ के बाद जशन ए इमाम हुसैन का आगाज़ हाफिज मोहम्मद अरशद वास्तवी ने तिलावते कुरान पाक से किया। शोरा ए कराम ने नात मनकबत पेश की।

 

नात मनकबत के बाद उलेमा ए दीन ने हज़रत इमाम हुसैन की यौम ए विलादत की मुबारकबाद देते हुए कहा कि हज़रत इमाम हुसैन की विलादत मदीना मुनव्वरा मे शाबान महीने की 03 तारीख को हुई। पैदाइश के पहले या सातवे दिन जिब्रईल अमीन ने कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल आप पर अल्लाह का सलाम हो इस बच्चे का नाम शब्बीर रखना शब्बीर को अरबी मे हुसैन कहते है उनका नाम अल्लाह की तरफ से हुसैन रखा गया सुबहान अल्लाह।

 

ख़ादिम खानकाहे हुसैनी इखलाक अहमद डेविड चिश्ती ने कहा कि रसूल ए खुदा हज़रत इमाम हसन इमाम हुसैन से बहुत मोहब्बत करते थे हमे भी अहले बैत से मोहब्बत करने के साथ उनके बताए रास्ते पर चलना चाहिए। इमाम हुसैन ने इंसाफ के लिए व जुल्म के खिलाफ कुर्बान होकर पूरी दुनिया मे इंसानियत को जिंदा रखा। आज दहशतगर्द जेहाद के नाम पर मासूमों, बेगुनाहों का खून बहाकर इस्लाम को बदनाम कर रहे है, वो इस्लाम से ख़ारिज़ है जेहाद तो इमाम हुसैन ने किया इंसाफ के लिए जुल्म के खिलाफ इंसानियत को ज़िन्दा रखने के लिए अपनी नफ्श पर काबू रखा यह है जेहाद , ज़ुल्म जिनाकारी नशाखोरी के खिलाफ व हक़ पर हमेशा रहे यह है जिहाद, गरीबों की मदद करें, रिश्तों को मजबूत रखें गलती होने पर भी रिश्तों को तोड़ने के बजाए जोड़े रखें यह है जिहाद। हज़रत इमाम हुसैन की ज़िंदगी व शहादत दोनो ने ही इंसान की मानवियता व फजीलत को महान बनाया है। औरतो की इज़्जत की हिफाज़त के जज़्बे को देखना है तो हुसैन का किरदार देखो उनकी जिंदगी का हर पहलू एक खास अज़मत लिए हुए है ऐसा लगता है सारी अज़मते उनमे सिमट गयी है। खिताब के बाद सलातो सलाम का नज़राना पेशकर नज़र इमाम हुसैन होने के बाद दरगाह की गुलपोशी इत्र केवड़ा संदल लगाकर किया और दुआ हुई।

 

दुआ मे हाफ़िज़ मोहम्मद अरशद वास्तवी ने अल्लाह की बारगाह मे पैगम्बर ए इस्लाम,मदीने वाले आक़ा, विलादते इमाम हुसैन के सदके मे खातून ए इस्लाम को खातून ए जन्नत के नक्शे कदम व हज़रत इमाम हुसैन के बताये रास्तो पर चलने, नमाज़ की पाबंदी करने, हम सबके गुनाहों को माफ करने, हमारे मुल्क सूबे व शहर मे अमनो अमान कायम रहने, आतंक को तबाह करने, मासूम बच्चों बहू बेटियों के साथ वहशी हरकत करने वालो को तबाह और बर्बाद करने, बच्चों बेटी बेटो के इल्म मे तवज्जो देने की दुआ की। दुआ के बाद खानकाहे हुसैनी के बाहर राहगिरों, बच्चों, नमाज़ियों को मिष्ठान का वितरण हुआ जो शाम तक चलता रहा।

 

जशन मे खादिम खानकाहे हुसैनी इखलाक अहमद डेविड चिश्ती, हाफिज़ मोहसिन चिश्ती, हाजी गौस रब्बानी, हाफिज़ मोहम्मद मुशीर, हाफिज़ मोहम्मद कफील हुसैन, जमालुद्दीन फारुकी, परवेज़ आलम वारसी, मोहम्मद जावेद, एजाज़ अहमद, अबरार अहमद, फाजिल चिश्ती, मोहम्मद वसीम, मोहम्मद हफीज़, एजाज़ रशीद, अफज़ाल अहमद आदि मुख्य थे।

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