मृदा की सेहत सुधारने से बढ़ेगी खेती की उत्पादकता

 

सीएसएयूएटी कानपुर में मृदा जैविक कार्बन बढ़ाने को शुरू हुआ संकल्प अभियान

 

कानपुर, 24 जनवरी।

चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर के प्रसार निदेशालय स्थित लाल बहादुर शास्त्री सभागार में “मृदा में जैविक पदार्थ बढ़ाओ संकल्प अभियान” का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के. विजयेंद्र पांडियन एवं अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।

 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी के निदेशक प्रसार डॉ. एस. के. सिंह ने कहा कि किसानों तक आवश्यकता के अनुसार आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रभावी हस्तांतरण आवश्यक है। उन्होंने बताया कि उन्नत बीज, आधुनिक उपकरण और बेहतर सिंचाई पद्धतियों से कृषि उत्पादन में वृद्धि संभव है। ड्रिप सिंचाई, हाइड्रोपोनिक्स और जैविक खेती जैसी तकनीकें ग्रामीण क्षेत्रों में खेती को अधिक लाभकारी बना रही हैं। उन्होंने जलवायु परिवर्तन को देखते हुए जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने पर भी जोर दिया।

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. के. विजयेंद्र पांडियन ने कहा कि वैज्ञानिक सस्य-जलवायु क्षेत्रों के अनुरूप कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचाएं। उन्होंने जैविक खेती, फसल चक्र और समेकित कीट प्रबंधन के माध्यम से कृषि लागत घटाने तथा स्थानीय मंडियों और फसल प्रसंस्करण से किसानों की आय बढ़ाने की बात कही। उन्होंने मृदा में जीवांश कार्बन की वृद्धि को टिकाऊ कृषि की आधारशिला बताया।

 

विशिष्ट अतिथि बांदा कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार डॉ. एन. के. वाजपेई ने किसानों के प्रशिक्षण के व्यावहारिक तरीकों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर निदेशक प्रसार डॉ. आर. के. यादव ने बताया कि देश में लगभग 140 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में खेती हो रही है, जहां मृदा में जैविक पदार्थ बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एक ग्राम मिट्टी में लगभग 6000 से अधिक सूक्ष्म जीव होते हैं, जो फसल उत्पादन और पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में वर्ष 2026 का कैलेंडर भी जारी किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अरविंद कुमार यादव ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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