मदरसा गौसिया कादरिया शकूरिया में 44वां उर्से शकूरी व जश्ने दस्तारबंदी संपन्न

 

मौलाना नजरुल इस्लाम को मिली मुफ्ती की सनद, 32 छात्रों को विभिन्न उपाधियां

 

बिल्हौर कस्बा स्थित मदरसा गौसिया कादरिया शकूरिया में मंगलवार को अकीदत और रूहानियत के साथ 44वां उर्से शकूरी व जश्ने दस्तारबंदी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम सैय्यद उवैस मुस्तफा वास्ती, बिलग्राम शरीफ की सरपरस्ती में संपन्न हुआ। जलसे की कयादत काजी-ए-शहर बिल्हौर मौलाना अनीसुर्रहमान नूरी ने की, जबकि सदारत नायब शहरकाजी मौलाना मोहम्मद सलमान आरिफ ने की।कार्यक्रम की शुरुआत मदरसे के छात्रों द्वारा कुरआन-ए-पाक की तिलावत से हुई। इसके बाद उलेमा-ए-किराम ने तकरीरों के माध्यम से इल्म, अखलाक और तालीम की अहमियत पर विस्तार से रोशनी डाली।इस अवसर पर 32 मदरसा छात्रों को तलबा, आलिम, मुफ्ती और हाफिज की सनदें प्रदान की गईं। बिल्हौर कस्बे के मौलाना नजरुल इस्लाम को बिलग्राम शरीफ से तशरीफ लाए हज़रत उवैस मुस्तफा मियां द्वारा मुफ्ती की सनद से नवाज़ा गया। वहीं कस्बे के कौनैन रज़ा खान व उवैस खान कादरी को हाफिज की दस्तार नायब शहरकाजी मौलाना सलमान आरिफ ने प्रदान की।जलसे को संबोधित करते हुए जिला बहराइच से आए मुफ्ती रफीक आलम ने शिक्षा की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चे मुल्क और समाज की असली रौनक होते हैं। उन्हें दीनी तालीम के साथ-साथ दुनियावी तालीम से भी लैस करना हर वालिदैन की जिम्मेदारी है। कुरआन पाक में अल्लाह तआला का पहला हुक्म “पढ़ो” है, जो तालीम की बुनियाद को दर्शाता है।मौलाना फुरकान खान ने कहा कि इल्म हासिल करने के रास्ते में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, इंसान को हर हाल में इल्म से जुड़ा रहना चाहिए। इल्म ही इंसान को हक और बातिल, अच्छाई और बुराई में फर्क सिखाता है।वहीं शहरकाजी मौलाना अनीसुर्रहमान नूरी ने कहा कि अगर बच्चों को सही तालीम और सही राह दी जाए तो वही कौम के रोशन चिराग बनते हैं, और अगर तालीम से महरूम रखा जाए तो वही समाज और देश के लिए नुकसान का कारण बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि इल्म के साथ अच्छे अमल, अखलाक और किरदार का होना बेहद जरूरी है, क्योंकि इल्म रोशनी है और जहालत अंधेरा।कार्यक्रम में बिल्हौर सहित कानपुर, कन्नौज व आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में अवाम ने शिरकत की। मदरसे के छात्र-छात्राओं की भागीदारी ने कार्यक्रम को और गरिमामय बना दिया।समापन अवसर पर देश में अमन, सुकून और तरक्की के लिए सामूहिक दुआ की गई। कार्यक्रम के अंत में सलातो सलाम के बाद मुख्य अतिथि काजी-ए-शहर कानपुर मुफ्ती साकिब अदीब मिस्बाही ने मुल्क की सलामती और खुशहाली की दुआ कराई।इस मौके पर डॉ. गुलाम हुसैन, मास्टर सुल्तान आरिफ, मास्टर कलीम अहमद, मास्टर मुहीउद्दीन, पत्रकार कसीम रज़ा, मो. रफीक सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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